HindiClass 12

Aroh

Hindi Core (Prose & Poetry)15 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in Aroh

A quick revision map of Aroh — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

Aatmaparichay, Ek Geet

NCERT Class 12 Hindi Aroh Aatmaparichay, Ek Geet — ये दोनों कविताएँ हरिवंश राय बच्चन (जन्म 1907, इलाहाबाद; निधन 2003, मुंबई) द्वारा रचित हैं, जिनमें आत्मपरिचय में कवि का जग से प्रीतिकलह का संबंध और एक गीत में समय के गुजरने की चंचल अनुभूति व्यक्त होती है।

  • 1कवि परिचय: हरिवंश राय बच्चन, जन्म सन् 1907 इलाहाबाद में, निधन सन् 2003 मुंबई में; 1942-1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक, तत्पश्चात् आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से संबद्ध और विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ।
  • 2विधा: गीत-कविता; पाठ के अनुसार बच्चन ने 'छायावाद की लाक्षणिक वक्रता के बजाय सीधी-सादी जीवंत भाषा और संवेदनसिक्त गेय शैली में' अपनी बात कही।
  • 3आत्मपरिचय का केंद्रीय भाव: पाठ के अनुसार 'दुनिया से मेरा संबंध प्रीतिकलह का है, मेरा जीवन विरोधों का सामंजस्य है' — जग का भार उठाते हुए भी प्यार, स्वप्न और मस्ती साथ लिए चलना।
  • 4विरोधाभासमूलक सामंजस्य: 'उन्मादों में अवसाद, रोदन में राग, शीतल वाणी में आग' — कवि के व्यक्तित्व में परस्पर विरोधी भाव एकसाथ विद्यमान हैं।
  • 5एक गीत का भाव: 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' — पाठ के अनुसार 'समय के गुजरते जाने के एहसास में लक्ष्य-प्राप्ति के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा' इस गीत में है।
02

Patang

NCERT Class 12 Hindi Aroh Patang कविता आलोक धन्वा द्वारा रचित है, जो उनके एकमात्र काव्य-संग्रह 'दुनिया रोज बनती है' का हिस्सा है; इसमें शरद ऋतु के आगमन और पतंग उड़ाते बच्चों की बालसुलभ उमंगों का सजीव चित्रण किया गया है।

  • 1कवि परिचय: आलोक धन्वा का जन्म सन् 1948 ई. में मुंगेर (बिहार) में हुआ; उनकी पहली कविता 'जनता का आदमी' 1972 में प्रकाशित हुई।
  • 2प्रमुख कृतियाँ: 'भागी हुई लड़कियाँ', 'ब्रूनो की बेटियाँ' से प्रसिद्धि; एकमात्र काव्य-संग्रह 'दुनिया रोज बनती है' सन् 98 में प्रकाशित।
  • 3विधा: यह एक लंबी कविता है जिसके तीसरे भाग को पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है।
  • 4केंद्रीय भाव: पतंग के बहाने बालसुलभ इच्छाओं एवं उमंगों का सुंदर चित्रण; पतंग बच्चों की उमंगों का रंग-बिरंगा सपना है जो आसमान की ऊँचाइयों को छूना चाहता है।
  • 5प्रकृति-चित्रण: भादो की बौछारें जाने के बाद 'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा' और शरद का आगमन — बाल क्रियाकलापों एवं प्रकृति में आए परिवर्तन को सुंदर बिंबों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है।
03

Kavita Ke Bahane, Baat Seedhi Thi Par

NCERT Class 12 Hindi Aroh Kavita Ke Bahane, Baat Seedhi Thi Par कुँवर नारायण द्वारा रचित दो कविताएँ हैं जो NCERT कक्षा 12 हिंदी 'आरोह' पाठ्यपुस्तक के तीसरे अध्याय में संकलित हैं — पहली 'इन दिनों' संग्रह से और दूसरी 'कोई दूसरा नहीं' संग्रह से ली गई है।

  • 1कवि: कुँवर नारायण — जन्म 19 सितंबर 1927, उत्तर प्रदेश; निधन 2017, दिल्ली
  • 2प्रमुख संग्रह: चक्रव्यूह (1956), इन दिनों, कोई दूसरा नहीं, आत्मजयी (प्रबंध काव्य); पुरस्कार: ज्ञानपीठ, साहित्य अकादेमी, व्यास सम्मान सहित अनेक
  • 3'कविता के बहाने' — 'इन दिनों' संग्रह से; केंद्रीय भाव: चिड़िया की उड़ान की सीमा है, फूल की परिणति निश्चित है, पर बच्चे के सपनों की तरह कविता 'सब घर एक कर देती है' — घर, भाषा और समय की सीमाएँ खुद-ब-खुद टूट जाती हैं
  • 4'बात सीधी थी पर' — 'कोई दूसरा नहीं' संग्रह से; केंद्रीय भाव: हर बात के लिए सही शब्द नियत होता है जैसे हर पेंच के लिए एक निश्चित खाँचा — जबरदस्ती से भाषा मोड़ने पर बात प्रभावहीन हो जाती है
  • 5चूड़ी, कील, पेंच जैसे मूर्त उपमानों के माध्यम से कवि ने कथ्य की अमूर्तता को साकार किया है
04

Camera Mein Band Apahij

NCERT Class 12 Hindi Aroh Camera Mein Band Apahij — यह कविता रघुवीर सहाय द्वारा रचित है, जो 'लोग भूल गये हैं' संग्रह से ली गई है; इसमें दूरदर्शन के एक कार्यक्रम के माध्यम से मीडिया की संवेदनहीनता और अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा के व्यावसायिक दोहन की विडंबना को उजागर किया गया है।

  • 1कवि-परिचय: रघुवीर सहाय का जन्म सन् 1929 में लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में और निधन सन् 1990 में दिल्ली में हुआ; साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता; पत्रकार एवं कवि।
  • 2प्रमुख रचनाएँ: 'सीढ़ियों पर धूप में', 'आत्महत्या के विरुद्ध', 'हँसो-हँसो जल्दी हँसो'; अज्ञेय द्वारा संपादित 'दूसरा सप्तक' (1951) में आरंभिक कविताएँ।
  • 3विधा एवं स्रोत: कविता; 'लोग भूल गये हैं' संग्रह से संकलित।
  • 4केंद्रीय भाव: दूरदर्शन कार्यक्रम के बहाने मीडिया की व्यावसायिक संवेदनहीनता पर व्यंग्य — अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा को 'रोचक' बनाने के लिए उसका शोषण करने की प्रवृत्ति का चित्रण।
  • 5काव्य-शिल्प: कविता बातचीत की सहज शैली में लिखी गई है; कोष्ठकों ('कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा', 'यह प्रश्न पूछा नहीं जाएगा', 'परदे पर वक्त की कीमत है') के माध्यम से पर्दे के पीछे के निर्देश और असली मंशा उजागर होती है।
05

Usha

NCERT Class 12 Hindi Aroh Usha शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित एक प्रयोगवादी कविता है, जो सूर्योदय से ठीक पहले पल-पल बदलते प्रकृति-चित्र को गाँव के परिवेश के उपमानों के माध्यम से जीवंत बनाती है।

  • 1कवि परिचय: शमशेर बहादुर सिंह का जन्म 13 जनवरी सन् 1911 को देहरादून (उत्तर प्रदेश, अब उत्तराखंड) में हुआ; निधन सन् 1993 में अहमदाबाद में।
  • 2प्रमुख रचनाएँ: कुछ कविताएँ, कुछ और कविताएँ, चुका भी हूँ नहीं मैं, इतने पास अपने, बात बोलेगी, काल तुझसे होड़ है मेरी तथा उर्दू-हिंदी कोश का संपादन।
  • 3विधा: प्रयोगवादी कविता; शमशेर की पहचान बिंबधर्मी कवि के रूप में है — उनकी कविता में शब्दों से रंग, रेखा, स्वर और कूची की अद्भुत कशीदाकारी का माद्दा है।
  • 4केंद्रीय भाव: यह कविता सूर्योदय के ठीक पहले के पल-पल परिवर्तित प्रकृति का शब्द-चित्र है; कवि भोर के आसमान की गति को गाँव के जीवन भरे हलचल से जोड़ने वाला स्रष्टा है।
  • 5उपमान: शंख (नीला नभ), राख से लीपा गीला चौका, लाल केसर से धुली काली सिल, स्लेट पर लाल खिड़या चाक, और नील जल में गौर झिलमिल देह — ये सभी उपमान गाँव के परिवेश से लिए गए हैं।
06

Badal Raag

NCERT Class 12 Hindi Aroh Badal Raag सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता है, जो उनके काव्य-संग्रह 'अनामिका' में छह खंडों में प्रकाशित 'बादल राग' का छठा खंड है। इस कविता में कवि बादल को विप्लव (क्रांति) के प्रतीक के रूप में देखते हुए लघुमानव (आम आदमी) की मुक्ति और नव-निर्माण का आह्वान करते हैं।

  • 1कवि-परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म सन् 1899 में महिषादल (बंगाल के मेदिनीपुर जिले में) हुआ; पारिवारिक गाँव गढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश); निधन सन् 1961 में इलाहाबाद में।
  • 2विधा व स्रोत: 'बादल राग' अनामिका संग्रह में छह खंडों में प्रकाशित है; पाठ्यक्रम में उसका छठा खंड लिया गया है। निराला छायावाद के प्रमुख कवि हैं।
  • 3केंद्रीय भाव: बादल क्रांति और नव-निर्माण का अग्रदूत है — किसान-मजदूर की आकांक्षाएँ उसे नव-निर्माण के राग के रूप में पुकार रही हैं।
  • 4काव्य-सौंदर्य: पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है; कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग है; निराला ने मुक्त छंद में रचना की है।
  • 5प्रमुख बिंब: 'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर, क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर, गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर' — घायल होने पर भी हिम्मत न हारने वाले बादल वीरों के दल की तरह दिखाई देते हैं।
07

Kavitavali, Lakshman Murcha Aur Ram Ka Vilap

NCERT Class 12 Hindi Aroh Kavitavali, Lakshman Murcha Aur Ram Ka Vilap — यह पाठ भक्तिकाल की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं 'कवितावली' (उत्तर कांड) और 'रामचरितमानस' (लंका कांड) से लिया गया है, जिसमें युगीन आर्थिक पीड़ा और लक्ष्मण-मूर्च्छा पर राम के मर्मस्पर्शी विलाप का चित्रण है।

  • 1कवि परिचय: गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा (उत्तर प्रदेश) के राजापुर गाँव में हुआ; निधन सन् 1623 में काशी में; प्रमुख रचनाएँ — रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, दोहावली, कवितावली आदि।
  • 2विधा एवं भाषा: कवितावली में कवित्त व सवैया छंद हैं; रामचरितमानस-प्रसंग में चौपाई, दोहा और सोरठा प्रयुक्त हैं; रचना-भाषाएँ अवधी व ब्रजभाषा (लोकभाषाएँ)।
  • 3पहला छंद — पेट की आग: 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' — किसान, भिखारी, चोर, बाजीगर सभी पेट की आग बुझाने के लिए ऊँचे-नीचे कर्म करते हैं; राम-भक्ति को इसका एकमात्र समाधान बताया गया है।
  • 4दूसरा छंद — दारिद-दसानन: 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' — खेती, भीख, व्यापार, नौकरी सब बंद हैं; दरिद्रता को रावण (दसानन) से उपमित कर बेकारी और पीड़ा का यथार्थपरक चित्रण किया गया है।
  • 5तीसरा छंद — स्वाभिमानी भक्त: 'धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ' — तुलसी जाति-पाँत के सभी विभेदों को अस्वीकार कर केवल राम के सेवक के रूप में अपनी पहचान घोषित करते हैं।
08

Rubaaiyan, Gazal

NCERT Class 12 Hindi Aroh Rubaaiyan, Gazal — यह पाठ उर्दू के प्रसिद्ध शायर फ़िराक गोरखपुरी (मूल नाम: रघुपति सहाय 'फ़िराक') की रुबाइयाँ प्रस्तुत करता है, जिनमें माँ और शिशु के वात्सल्य-प्रेम के साथ भारतीय लोकजीवन के जीवंत चित्र उकेरे गए हैं।

  • 1कवि परिचय: मूल नाम रघुपति सहाय 'फ़िराक'; जन्म 28 अगस्त 1896, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश); निधन सन् 1983; इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में अध्यापक रहे।
  • 2पुरस्कार एवं कृतियाँ: गुले-नग्मा के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड; प्रमुख कृतियाँ — गुले-नग्मा, बज्मे जिंदगीः रंगे-शायरी, उर्दू गजलगोई।
  • 3विधा — रुबाई: उर्दू और फ़ारसी का छंद; चार पंक्तियाँ; पहली, दूसरी और चौथी में तुक (काफ़िया); तीसरी पंक्ति स्वच्छंद।
  • 4केंद्रीय भाव: माँ और शिशु का वात्सल्य-प्रेम; चाँद, आँगन, दर्पण, दीवाली, रक्षाबंधन जैसे भारतीय लोक-प्रतीकों का सहज उपयोग।
  • 5काव्य-सौंदर्य: हिंदी-उर्दू-लोकभाषा का गठबंधन; पाठ में कवि का यह कथन उद्धृत है — 'दिव्यता भौतिकता से पृथक वस्तु नहीं है। जिसे हम भौतिक कहते हैं वही दिव्य भी है।'
09

Chhota Mera Khet, Bangulo Ke Pankh

NCERT Class 12 Hindi Aroh Chhota Mera Khet, Bangulo Ke Pankh — यह अध्याय गुजराती के प्रसिद्ध कवि उमाशंकर जोशी की दो कविताओं का हिंदी रूपांतरण है: 'छोटा मेरा खेत' में खेती के रूपक से कवि-कर्म को चित्रित किया गया है, और 'बगुलों के पंख' काले बादलों में उड़ते श्वेत बगुलों की एक नयनाभिराम दृश्य-कविता है।

  • 1कवि परिचय: उमाशंकर जोशी का जन्म सन् 1911 में गुजरात में हुआ और निधन सन् 1988 में; वे बीसवीं सदी की गुजराती कविता को नयी भंगिमा और नया स्वर देनेवाले प्रमुख आधुनिकतावादी कवि थे; उन्होंने सन् 1947 से 'संस्कृति' पत्रिका का संपादन किया।
  • 2विधा: दोनों रचनाएँ कविताएँ हैं; गुजराती से हिंदी रूपांतरण रघुवीर चौधरी और भोलाभाई पटेल ने किया है।
  • 3'छोटा मेरा खेत' का केंद्रीय भाव: खेती-कर्म का आरोप कर कवि-कर्म के हर चरण को दिखाया गया है — अंधड़ से बीज बोया जाता है, कल्पना के रसायनों से बीज विगलित होता है, शब्दों के अंकुर फूटते हैं, और अंत में ऐसी रस-धारा निकलती है जो 'लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।'
  • 4'बगुलों के पंख' का केंद्रीय भाव: कवि काले बादलों के ऊपर 'पाँती-बँधे बगुलों के पंख' देखते हैं जो 'तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया' के समान दिखते हैं; यह दृश्य-सौंदर्य 'हौले हौले' कवि को अपनी माया में बाँधता चला जाता है।
  • 5पाठ्यपुस्तक के अभ्यास में 'छोटा मेरा खेत' में बिंब की खोज और रूपक की पहचान के लिए कहा गया है — दोनों शब्द पाठ के अभ्यास खंड में स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं।
10

Bhaktin

यह पाठ NCERT Class 12 Hindi Aroh Bhaktin है — महादेवी वर्मा द्वारा लिखित एक संस्मरणात्मक रेखाचित्र, जो उनकी कृति 'स्मृति की रेखाएँ' में संकलित है। इसमें लेखिका ने अपनी सेविका भक्तिन के संघर्षमय जीवन और उनके अनोखे पारस्परिक संबंध का मार्मिक चित्रण किया है।

  • 1लेखिका परिचय: महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में फ़र्रूखाबाद (उत्तर प्रदेश) में और निधन सन् 1987 में इलाहाबाद में हुआ। वे कविता के क्षेत्र में छायावाद के चार स्तंभों में से एक मानी जाती हैं (अन्य तीन — पंत, प्रसाद, निराला) और अपने संस्मरणात्मक रेखाचित्रों के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
  • 2विधा एवं संकलन: यह पाठ संस्मरणात्मक रेखाचित्र विधा में लिखा गया है। यह महादेवी जी की कृति 'स्मृति की रेखाएँ' में संकलित है।
  • 3केंद्रीय भाव: पितृसत्तात्मक और छल-छद्म भरे समाज में स्त्री के स्वाभिमान और संघर्ष का चित्रण; साथ ही भक्तिन के बहाने लेखिका के व्यक्तित्व के अनछुए आयामों का उद्घाटन।
  • 4मुख्य पात्र एवं परिचय: भक्तिन का वास्तविक नाम लछमिन (लक्ष्मी) है। वह ऐतिहासिक झूँसी में गाँव-प्रसिद्ध एक सूरमा की एकलौती पुत्री थी। लेखिका ने उसकी कंठी माला देखकर उसका नाम 'भक्तिन' रखा।
  • 5मुख्य घटनाएँ: पाँच वर्ष की वय में हँडिया ग्राम के एक संपन्न गोपालक के घर विवाह; पुत्रियों के जन्म पर सास-जिठानियों की उपेक्षा; पति की असमय मृत्यु के बाद अलगौझा (बँटवारा) लेकर संपत्ति की रक्षा; बड़ी बेटी पर पंचायत द्वारा जबरन पति थोपा जाना; जमींदार द्वारा दिन भर कड़ी धूप में खड़े रखे जाने के अपमान के बाद शहर आगमन।
11

Bazar Darshan

NCERT Class 12 Hindi Aroh Bazar Darshan जैनेंद्र कुमार द्वारा लिखित एक विचार-प्रधान निबंध है जिसमें बाजार की जादुई आकर्षण-शक्ति, उपभोक्तावाद और मनुष्य की क्रय-मनोवृत्ति का गहन विश्लेषण किया गया है।

  • 1लेखक परिचय: जैनेंद्र कुमार का जन्म सन् 1905 में अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ; निधन सन् 1990 में; हिंदी के प्रमुख कथाकार एवं गांधीवादी चिंतक; पद्मभूषण, साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा भारत-भारती सम्मान से सम्मानित।
  • 2विधा: विचार-प्रधान गद्य निबंध; भाषा-शैली सरल एवं अनौपचारिक, कहीं दार्शनिक और कहीं किस्सागो के अंदाज में।
  • 3केंद्रीय भाव: बाजार में एक जादू है जो आँख की राह काम करता है — 'जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है'; उपाय — 'बाजार जाओ तो खाली मन न हो।'
  • 4मुख्य पात्र व घटनाएँ: पहला मित्र जरूरत से अधिक सामान खरीद लाया; दूसरा मित्र खाली हाथ लौटा क्योंकि सब-कुछ चाहता था पर कुछ छोड़ना नहीं चाहता था; चूरन वाले भगत जी प्रतिदिन केवल छह आने कमाते और बाजार के जादू से पूर्णतः अप्रभावित रहते।
  • 5बाजारूपन: खाली मन से बाजार जाने वाले 'कपट बढ़ाते हैं'; इससे परस्पर सद्भाव घटता है और लोग 'गाहक और बेचक' मात्र रह जाते हैं; बाजार को सार्थकता वही देता है जो जानता है कि उसे क्या चाहिए।
12

Kaale Megha Paani De

NCERT Class 12 Hindi Aroh Kaale Megha Paani De धर्मवीर भारती द्वारा लिखित एक संस्मरण है जिसमें अनावृष्टि के समय लोक-प्रचलित विश्वास और वैज्ञानिक तर्क के द्वंद्व का सजीव चित्रण है।

  • 1लेखक परिचय: धर्मवीर भारती (जन्म सन् 1926, इलाहाबाद; निधन सन् 1997); पद्मश्री एवं व्यास सम्मान से सम्मानित।
  • 2विधा: संस्मरण — यह पाठ लेखक के किशोर जीवन का स्मरण है।
  • 3केंद्रीय भाव: लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व का चित्रण; साथ ही यह संदेश कि बिना त्याग के दान नहीं होता और सामूहिक कल्याण के लिए पहले देना होता है।
  • 4मुख्य पात्र व घटनाएँ: इंदर सेना (दस से अठारह वर्ष के लड़कों की टोली जो 'काले मेघा पानी दे' गाते हुए घर-घर से पानी माँगती थी), जीजी (वृद्ध स्नेहमयी स्त्री जिनके तर्क ने लेखक के किले को पस्त कर दिया) और लेखक का स्वयं का किशोर रूप (आर्यसमाजी संस्कारों वाला, कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री जो इंदर सेना को अंधविश्वास मानता था)।
  • 5जीजी का तर्क: 'यह जो सूखे हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं वह भी बुवाई है' — पानी गली में बोने से काले मेघ की फसल आती है; और 'बिना त्याग के दान नहीं होता।'
13

Pahalwan Ki Dholak

यह NCERT Class 12 Hindi Aroh Pahalwan Ki Dholak (पहलवान की ढोलक) फ़णीश्वर नाथ रेणु द्वारा लिखित आंचलिक कहानी है, जो लुट्टन सिंह पहलवान के संघर्षपूर्ण जीवन और महामारी-पीड़ित गाँव में उनकी ढोलक की संजीवनी शक्ति का मार्मिक चित्रण करती है।

  • 1लेखक फ़णीश्वर नाथ रेणु का जन्म 4 मार्च, 1921 को औराही हिगना (जिला पूर्णिया, अब अररिया), बिहार में हुआ; निधन 11 अप्रैल, 1977 को पटना में।
  • 2विधा: आंचलिक कहानी। रेणु हिंदी साहित्य में 'आंचलिक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठित' हैं; प्रमुख उपन्यास: मैला आँचल, परती परिकथा; कहानी-संग्रह: ठुमरी, अगिनखोर।
  • 3केंद्रीय भाव: व्यवस्था के बदलने से लोक-कला और लोक-कलाकार का अप्रासंगिक हो जाना; साथ ही यह भाव कि ढोलक की आवाज 'मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी।'
  • 4मुख्य पात्र: लुट्टन सिंह पहलवान (नौ वर्ष में अनाथ, सास ने पाले), चाँद सिंह उर्फ 'शेर के बच्चे' (पंजाब से आए, बादल सिंह के शिष्य), राजा श्यामानंद (लुट्टन के संरक्षक)।
  • 5प्रमुख घटनाएँ: दंगल में चाँद सिंह को 'चारों खाने चित' करना → राज-पहलवान बनना → पंद्रह वर्ष अजेय → नए राजकुमार द्वारा निष्कासन → गाँव में महामारी → दोनों बेटों की मृत्यु → स्वयं लुट्टन का अंत।
14

Shirish Ke Phool

NCERT Class 12 Hindi Aroh Shirish Ke Phool हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित ललित निबंध है जो उनके संग्रह 'कल्पलता' से उद्धृत है; इसमें शिरीष वृक्ष के माध्यम से मनुष्य की अजेय जिजीविषा और गांधीजी जैसी अनासक्त जीवन-दृष्टि को महान मानवीय मूल्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

  • 1लेखक परिचय: हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 में आरत दुबे का छपरा, बलिया (उत्तर प्रदेश) में हुआ; मृत्यु सन् 1979 में दिल्ली में हुई; उन्हें 'आलोक पर्व' पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण और लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट् की उपाधि प्राप्त हुई।
  • 2विधा और स्रोत: यह ललित निबंध है जो द्विवेदी जी के निबंध-संग्रह 'कल्पलता' से उद्धृत है; निबंध-विधा में इनका साहित्य व्यक्तित्व-व्यंजना और आत्मपरक शैली से युक्त है।
  • 3केंद्रीय भाव: जेठ की प्रचंड गरमी और लू में भी अविचल फूलते रहने के कारण शिरीष को 'कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार' करने वाला बताया गया है; यह अजेय जिजीविषा और धैर्यपूर्ण कर्तव्यशीलता का प्रतीक है।
  • 4गांधीजी और शिरीष की समानता: लेखक लिखता है — 'शिरीष वायुमंडल से रस खींचकर इतना कोमल और इतना कठोर है। गांधी भी वायुमंडल से रस खींचकर इतना कोमल और इतना कठोर हो सका था।' अवधूत गांधी की अनुपस्थिति पर लेखक की पीड़ा — 'हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!'
  • 5पुरानी पीढ़ी पर व्यंग्य: शिरीष के पुराने फल नए पत्ते-फलों के धकेलने तक स्थान नहीं छोड़ते; लेखक इसे उन नेताओं से जोड़ता है 'जो किसी प्रकार जमाने का रुख नहीं पहचानते'; संदेश — 'हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो तो कोड़े की मार से बच भी सकते हो। जमे कि मरे!'
15

Shram Vibhajan Aur Jaati Pratha, Meri Kalpana Ka Adarsh Samaj

NCERT Class 12 Hindi Aroh Shram Vibhajan Aur Jaati Pratha, Meri Kalpana Ka Adarsh Samaj यह पाठ डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा लिखित विचारात्मक निबंध है जिसमें जाति-प्रथा को श्रम विभाजन का अस्वाभाविक रूप सिद्ध कर आदर्श समाज की स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता पर आधारित कल्पना प्रस्तुत की गई है।

  • 1लेखक परिचय: डॉ. भीमराव आंबेडकर — जन्म 14 अप्रैल 1891, महू (मध्य प्रदेश); निधन दिसंबर 1956, दिल्ली; भारतीय संविधान के निर्माताओं में से एक; दलितों, स्त्रियों और मजदूरों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्षरत।
  • 2विधा: विचारात्मक निबंध (गद्य); मूल अंग्रेज़ी भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' (1936) का ललई सिंह यादव कृत हिंदी-रूपांतर 'जाति-भेद का उच्छेद' के दो प्रकरण; यह भाषण जाति-पाँति तोड़क मंडल (लाहौर) के 1936 के वार्षिक सम्मेलन हेतु तैयार हुआ था, परंतु सम्मेलन स्थगित होने से पढ़ा न जा सका।
  • 3केंद्रीय भाव: जाति-प्रथा श्रम विभाजन नहीं बल्कि श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन है — यह विभिन्न वर्गों को ऊँच-नीच भी करार देती है; मनुष्य की रुचि या क्षमता नहीं, 'पूर्व लेख' (जन्म से निर्धारित नियति) इसका आधार है।
  • 4जाति-प्रथा और बेरोजगारी: पेशा परिवर्तन की अनुमति न देने से, भले ही पेशा अनुपयुक्त हो और मनुष्य भूखों मरे, वह उसमें जीवन-भर बँधा रहता है — इस प्रकार जाति-प्रथा बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।
  • 5आदर्श समाज की कल्पना: स्वतंत्रता, समता, भ्रातृता पर आधारित; आंबेडकर के अनुसार 'लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति ही नहीं है, लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।'

More Hindi books

Want offline access with notes & solutions?

Download CBSE Prepmaster for free — includes NCERT solutions, flashcards, mock tests & more.

Download Free App