Summary
NCERT Class 12 Hindi Aroh Rubaaiyan, Gazal — यह पाठ उर्दू के प्रसिद्ध शायर फ़िराक गोरखपुरी (मूल नाम: रघुपति सहाय 'फ़िराक') की रुबाइयाँ प्रस्तुत करता है, जिनमें माँ और शिशु के वात्सल्य-प्रेम के साथ भारतीय लोकजीवन के जीवंत चित्र उकेरे गए हैं।
फ़िराक गोरखपुरी (1896–1983) उर्दू के उन शायरों में हैं जिन्होंने परंपरागत रूमानियत और शास्त्रीयता से अलग हटकर लोकजीवन और प्रकृति को शायरी का विषय बनाया। उनकी रुबाइयों में माँ और शिशु के बीच का वात्सल्य-भाव केंद्र में है — चाँद पाने की ललक रखने वाला बालक, आँगन में लोका देती माँ, दीवाली के चीनी खिलौने और रक्षाबंधन की चमकती राखी जैसे घरेलू दृश्य जीवंत हो उठते हैं। हिंदी, उर्दू और लोकभाषा का अनूठा गठबंधन इन रुबाइयों की भाषाई विशेषता है। रुबाई चार-पंक्तियों वाली विधा है जिसमें पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक मिलाई जाती है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: मूल नाम रघुपति सहाय 'फ़िराक'; जन्म 28 अगस्त 1896, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश); निधन सन् 1983; इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में अध्यापक रहे।
- 02पुरस्कार एवं कृतियाँ: गुले-नग्मा के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड; प्रमुख कृतियाँ — गुले-नग्मा, बज्मे जिंदगीः रंगे-शायरी, उर्दू गजलगोई।
- 03विधा — रुबाई: उर्दू और फ़ारसी का छंद; चार पंक्तियाँ; पहली, दूसरी और चौथी में तुक (काफ़िया); तीसरी पंक्ति स्वच्छंद।
- 04केंद्रीय भाव: माँ और शिशु का वात्सल्य-प्रेम; चाँद, आँगन, दर्पण, दीवाली, रक्षाबंधन जैसे भारतीय लोक-प्रतीकों का सहज उपयोग।
- 05काव्य-सौंदर्य: हिंदी-उर्दू-लोकभाषा का गठबंधन; पाठ में कवि का यह कथन उद्धृत है — 'दिव्यता भौतिकता से पृथक वस्तु नहीं है। जिसे हम भौतिक कहते हैं वही दिव्य भी है।'
- 06शब्दार्थ (स्रोत: पाठ की शब्द-छवि) — लोका देना: उछाल-उछाल कर प्यार करने की एक क्रिया; हई: है ही; शब: रात।
- 07साहित्यिक परंपरा: पाठ के अनुसार उर्दू शायरी का बड़ा हिस्सा रूमानियत, रहस्य और शास्त्रीयता से बँधा रहा; नजीर अकबराबादी और इल्ताफ़ हुसैन हाली जैसे शायरों के साथ फ़िराक ने इस रिवायत को तोड़ा।
- 08समानांतर संदर्भ: पाठ में सूरदास की पंक्ति 'मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों' को फ़िराक की रुबाइयों के वात्सल्य-चित्रण से जोड़ा गया है।
Frequently asked questions
01फ़िराक गोरखपुरी का असली नाम क्या था?
फ़िराक गोरखपुरी का मूल नाम रघुपति सहाय 'फ़िराक' था। उनका जन्म 28 अगस्त 1896 को गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
02Firaq Gorakhpuri ko kaun se puraskar mile?
पाठ के अनुसार फ़िराक गोरखपुरी को गुले-नग्मा के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड मिले।
03रुबाई किसे कहते हैं? इसका छंद-विधान क्या है?
पाठ के अनुसार रुबाई उर्दू और फ़ारसी का एक छंद या लेखन शैली है जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं। पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (काफ़िया) मिलाया जाता है, जबकि तीसरी पंक्ति स्वच्छंद होती है।
04फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों का केंद्रीय भाव क्या है?
इन रुबाइयों में माँ और शिशु के वात्सल्य-प्रेम का चित्रण है — चाँद पाने की ललक, आँगन में लोका देना, दीवाली के चीनी खिलौने और रक्षाबंधन की राखी जैसे भारतीय लोकजीवन के दृश्य इन्हें जीवंत बनाते हैं।
05'लोका देना' का क्या अर्थ है?
पाठ की शब्द-छवि के अनुसार 'लोका देना' का अर्थ है — उछाल-उछाल कर प्यार करने की एक क्रिया।
06'हई' और 'शब' शब्दों के अर्थ क्या हैं?
पाठ में दी गई शब्द-छवि के अनुसार — 'हई' का अर्थ 'है ही' है और 'शब' का अर्थ 'रात' है।
07फ़िराक ने उर्दू शायरी की किस परंपरा को तोड़ा?
पाठ के अनुसार उर्दू शायरी का बड़ा हिस्सा रूमानियत, रहस्य और शास्त्रीयता से बँधा था जिसमें लोकजीवन और प्रकृति के पक्ष बहुत कम उभर पाए। नजीर अकबराबादी और इल्ताफ़ हुसैन हाली के साथ फ़िराक ने भी इस रिवायत को तोड़कर लोकजीवन को शायरी का विषय बनाया।
08Rubaaiyan mein chand ka kya mahatva hai?
रुबाइयों में बालक आँगन में चाँद पर ललचाया हुआ ठुनक रहा है। माँ उसे दर्पण देकर कहती है — 'देख आईने में चाँद उतर आया है।' चाँद यहाँ बालक की कल्पना और माँ के वात्सल्य का एक जीवंत प्रतीक बनकर आता है।
09पाठ में रक्षाबंधन का वर्णन कैसे है?
पाठ में रक्षाबंधन पर यह पंक्तियाँ हैं — 'बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे / भाई के है बाँधती चमकती राखी।' सावन की हलकी घटा और बिजली की चमक को राखी के लच्छों से जोड़ा गया है।
10फ़िराक के काव्य में किन भाषाओं का प्रयोग हुआ है?
पाठ के अनुसार फ़िराक की रुबाइयों में हिंदी, उर्दू और लोकभाषा का मिला-जुला अनूठा गठबंधन है — 'लोका देना', 'गेसू', 'जिदयाया', 'घरौंदा' जैसे शब्द इसी गठबंधन के उदाहरण हैं।
11फ़िराक गोरखपुरी की प्रमुख कृतियाँ कौन-सी हैं?
पाठ के अनुसार फ़िराक गोरखपुरी की प्रमुख कृतियाँ हैं — गुले-नग्मा, बज्मे जिंदगीः रंगे-शायरी और उर्दू गजलगोई।
12Class 12 Hindi Aroh chapter 8 Rubaaiyan summary in Hindi?
इन रुबाइयों में माँ और शिशु के वात्सल्य का चित्रण है — आँगन में चाँद पाने की जिद करते बालक, दीवाली के चीनी खिलौने और रक्षाबंधन की चमकती राखी जैसे लोकजीवन के दृश्य हिंदी-उर्दू-लोकभाषा के मेल में पिरोए गए हैं। कवि फ़िराक गोरखपुरी हैं।
13क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
More chapters in Aroh
This is the complete Aroh Chapter 8 as published by NCERT — every diagram, solved example, and exercise included, free. Browse all CBSE Class 12 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android