Class 12 Hindi

Chapter 11 — Bazar Darshan

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Overview

Summary

NCERT Class 12 Hindi Aroh Bazar Darshan जैनेंद्र कुमार द्वारा लिखित एक विचार-प्रधान निबंध है जिसमें बाजार की जादुई आकर्षण-शक्ति, उपभोक्तावाद और मनुष्य की क्रय-मनोवृत्ति का गहन विश्लेषण किया गया है।

जैनेंद्र कुमार का यह निबंध बाजार की जादुई शक्ति और उपभोक्ता-मनोवृत्ति का विश्लेषण करता है। दो मित्रों के अनुभवों के माध्यम से लेखक बताते हैं कि जब जेब भरी हो और मन खाली हो तो बाजार का जादू खूब काम करता है। इसका उपाय यह है कि बाजार जाते समय मन लक्ष्य से भरा हो। चूरन वाले भगत जी का उदाहरण देते हुए लेखक दिखाते हैं कि जो अपनी जरूरत जानता है उस पर बाजार का जादू नहीं चल सकता। केवल बाजार का पोषण करने वाले अर्थशास्त्र को लेखक ने 'अनीतिशास्त्र' कहा है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक परिचय: जैनेंद्र कुमार का जन्म सन् 1905 में अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ; निधन सन् 1990 में; हिंदी के प्रमुख कथाकार एवं गांधीवादी चिंतक; पद्मभूषण, साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा भारत-भारती सम्मान से सम्मानित।
  2. 02विधा: विचार-प्रधान गद्य निबंध; भाषा-शैली सरल एवं अनौपचारिक, कहीं दार्शनिक और कहीं किस्सागो के अंदाज में।
  3. 03केंद्रीय भाव: बाजार में एक जादू है जो आँख की राह काम करता है — 'जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है'; उपाय — 'बाजार जाओ तो खाली मन न हो।'
  4. 04मुख्य पात्र व घटनाएँ: पहला मित्र जरूरत से अधिक सामान खरीद लाया; दूसरा मित्र खाली हाथ लौटा क्योंकि सब-कुछ चाहता था पर कुछ छोड़ना नहीं चाहता था; चूरन वाले भगत जी प्रतिदिन केवल छह आने कमाते और बाजार के जादू से पूर्णतः अप्रभावित रहते।
  5. 05बाजारूपन: खाली मन से बाजार जाने वाले 'कपट बढ़ाते हैं'; इससे परस्पर सद्भाव घटता है और लोग 'गाहक और बेचक' मात्र रह जाते हैं; बाजार को सार्थकता वही देता है जो जानता है कि उसे क्या चाहिए।
  6. 06लेखक का निष्कर्ष: 'वह अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है' — जो केवल बाजार का पोषण करता है और जहाँ कपट सफल होता है व निष्कपट शिकार होता है।
  7. 07कठिन शब्दार्थ (शब्द-छवि से): पर्चेजिग पावर = खरीदने की शक्ति; असबाब = सामान; दरकार = जरूरत; पसोपेश = असमंजस; स्पृहा = इच्छा; परिमित = सीमित; नाचीज = महत्त्वहीन।
Questions

Frequently asked questions

01

'बाजार दर्शन' के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?

इस निबंध के लेखक जैनेंद्र कुमार हैं। यह विचार-प्रधान गद्य निबंध है जो हिंदी में उपभोक्तावाद एवं बाजारवाद पर केंद्रित है।

02

जैनेंद्र कुमार का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

जैनेंद्र कुमार का जन्म सन् 1905 में अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और उनका निधन सन् 1990 में हुआ।

03

बाजार का जादू किस स्थिति में सबसे अधिक काम करता है?

पाठ के अनुसार — 'जेब भरी हो, और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है।' जब मन में कोई निश्चित लक्ष्य न हो तो बाजार की चीजें खींचती हैं।

04

भगत जी कौन हैं और निबंध में उनका क्या महत्त्व है?

भगत जी लेखक के पड़ोस में रहने वाले चूरन विक्रेता हैं। वे प्रतिदिन केवल छह आने से अधिक नहीं कमाते और बाजार के जादू से पूर्णतः अप्रभावित रहते हैं — 'उस पर बाजार का जादू वार नहीं कर पाता।' वे इस निबंध के आदर्श व्यक्तित्व के प्रतीक हैं।

05

बाजार के जादू से बचने का उपाय क्या बताया गया है?

लेखक ने स्पष्ट कहा है — 'बाजार जाओ तो खाली मन न हो। मन खाली हो, तब बाजार न जाओ।' जब मन लक्ष्य से भरा हो तो 'बाजार भी फैला-का-फैला ही रह जाएगा।'

06

'बाजारूपन' से क्या तात्पर्य है?

जो लोग खाली मन से बाजार जाकर बिना जरूरत के खरीददारी करते हैं वे कपट बढ़ाते हैं — 'कपट बढ़ाते हैं' और 'परस्पर में सद्भाव की घटी' होती है। इसी अवस्था को लेखक ने 'बाजारूपन' कहा है।

07

लेखक ने किस अर्थशास्त्र को 'अनीतिशास्त्र' क्यों कहा है?

जो अर्थशास्त्र केवल बाजार का पोषण करता है और जहाँ 'कपट सफल होता है, निष्कपट शिकार होता है', उसे लेखक ने 'अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है' कहा है।

08

Bazar Darshan mein paisa power kaise kaam karta hai?

लेखक ने लिखा है — 'पैसा पावर है। पर उसके सबूत में आस-पास माल-टाल न जमा हो तो क्या वह खाक पावर है!' पैसे की 'पर्चेजिग पावर' के प्रदर्शन में ही पावर का रस है — यही बाजार में अनावश्यक खरीदारी की मूल प्रेरणा है।

09

जैनेंद्र कुमार को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?

उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत-भारती सम्मान तथा भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

10

'असंतोष, तृष्णा और ईर्ष्या' — इस वाक्यांश का निबंध में क्या संदर्भ है?

लेखक ने बताया है कि जो व्यक्ति खाली मन से चौक बाजार में जाता है उसे बाजार 'असंतोष, तृष्णा और ईर्ष्या से घायल कर मनुष्य को सदा के लिए बेकार बना डाल सकता है।'

11

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

12

Jainendra Kumar ki pramukh rachnaen kaun si hain?

प्रमुख उपन्यास — परख, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, जयवर्द्धन, मुक्तिबोध; कहानी-संग्रह — वातायन, एक रात, दो चिड़िया, फाँसी, पाजेब, नीलम देश की राजकन्या; निबंध-संग्रह — प्रस्तुत प्रश्न, जड़ की बात, सोच-विचार, समय और हम।

13

मन खाली और मन बंद में क्या अंतर है?

लेखक ने स्पष्ट किया है — 'मन खाली नहीं रहना चाहिए, इसका मतलब यह नहीं है कि वह मन बंद रहना चाहिए। जो बंद हो जाएगा, वह शून्य हो जाएगा।' मन को लक्ष्य से भरना है, जड़ता से बंद नहीं करना।

14

'पर्चेजिग पावर' और 'असबाब' का हिंदी अर्थ क्या है?

पाठ की 'शब्द-छवि' सूची के अनुसार: पर्चेजिग पावर = खरीदने की शक्ति; असबाब = सामान।

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