Class 11 Hindi

Chapter 12 — Sandhya Ke Baad

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Overview

Summary

NCERT Class 11 Hindi Antra Sandhya Ke Baad सुमित्रनंदन पंत द्वारा रचित एक कविता है जो उनके ग्राम्या संकलन से ली गई है। इस कविता में ढलती साँझ के समय गाँव के प्राकृतिक वातावरण, जनजीवन और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण किया गया है।

"संध्या के बाद" सुमित्रनंदन पंत की कविता है, जो उनके ग्राम्या संकलन से ली गई है। सूर्यास्त के समय साँझ की लाली तरु-शिखरों पर सिमट जाती है, नदी-तट के रंग बदलते हैं। बगुलों-सी वृद्धाएँ और विधवाएँ जप-ध्यान में मगन हैं; किसान, पक्षी और पशु घर लौटते हैं। बस्ती की मंद ढिबरी की रोशनी में किराना-दुकानदार लाला अपनी दरिद्रता और सामाजिक विषमता पर सोचता है। कविता के अंत में कवि समान वितरण और जन-विमुक्ति की कल्पना करता है, किंतु वास्तविकता वही रहती है—बुढ़िया आटा लेने आती है और लाला फिर डंडी मारता है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि परिचय: सुमित्रनंदन पंत (1900–1978) का जन्म कौसानी गाँव, अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड में हुआ; छायावादी कवियों में वे प्रकृति-प्रेम और सौंदर्य के कवि के रूप में चर्चित हैं और उन्हें शब्द-शिल्पी कवि भी कहा जाता है।
  2. 02विधा और स्रोत: कविता; पाठ्यपुस्तक में संकलित यह कविता पंत जी के ग्राम्या संकलन से ली गई है, जिसका मूल स्वर ग्रामीण जन-जीवन के विविध सामाजिक यथार्थ से जुड़ता है।
  3. 03केंद्रीय भाव: ढलती साँझ के समय गाँव के वातावरण, जनजीवन और प्रकृति का एकसाथ चित्रण—वृद्धाएँ, विधवाएँ, खेत से घर लौटते किसान, पशु-पक्षी और व्यापारी सभी इस चित्र में उपस्थित हैं।
  4. 04काव्य-सौंदर्य: कविता में तुलनात्मक चित्रों का प्रयोग दृश्य को मूर्त और सजीव बनाता है—जैसे "तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ" और "दीप शिखा-सा ज्वलित कलश / नभ में उठकर करता नीराजन" (ये उपमान पाठ में प्रयुक्त हैं)।
  5. 05सामाजिक चेतना: लाला (किराना-दुकानदार) के मन में दरिद्रता और शोषण के प्रश्न उठते हैं; कवि कल्पना करता है—"कर्म और गुण के समान ही / सकल आय-व्यय का हो वितरण" और "व्यक्ति नहीं, जग की परिपाटी / दोषी जन के दुःख क्लेश की।"
  6. 06प्रमुख पुरस्कार: पंत जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार प्राप्त हुए।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: ताम्रपर्ण = ताँबे की तरह लाल रंग के पत्ते; गोरज = गोधूलि; ढिबरी = मिट्टी के तेल से जलनेवाला छोटा-सा दीपक; सिकता = रेत, बालू; कथड़ी = पुराने कपड़े से बनाया गया लेवा, गुदड़ी।
Questions

Frequently asked questions

01

"संध्या के बाद" किसकी कविता है?

"संध्या के बाद" सुमित्रनंदन पंत (1900–1978) की कविता है।

02

Sandhya Ke Baad kavita kis sangrah se li gayi hai?

यह कविता पंत जी के ग्राम्या संकलन से ली गई है, जिसका मूल स्वर ग्रामीण जन-जीवन के विविध सामाजिक यथार्थ से जुड़ता है।

03

NCERT Class 11 Hindi Antra chapter 12 mein kya hai?

अंतरा कक्षा 11 के अध्याय 12 में सुमित्रनंदन पंत की कविता "संध्या के बाद" है, जिसमें ढलती साँझ के समय गाँव के वातावरण, जनजीवन और प्रकृति का सुंदर चित्रण हुआ है।

04

संध्या के समय प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं, कविता के आधार पर बताइए।

कविता के अनुसार साँझ की लाली तरु-शिखरों पर सिमट जाती है, पीपल के ताम्रपर्ण पत्तों से स्वर्णिम निर्झर झरते हैं, सूर्य क्षितिज पर ओझल होता है, नदी का जल नील लहरियों में लोड़ित होता है और धीरे-धीरे गहरी निशा-छाया छा जाती है।

05

"तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ" पंक्ति का आशय क्या है?

इस पंक्ति में नदी-तट पर जप-ध्यान में मगन वृद्धाओं और विधवाओं की तुलना बगुलों से की गई है। उनका अदृश्य अंतर-रोदन मंथर धारा में बहता प्रतीत होता है—"मंथर धारा में बहता / जिनका अदृश्य, गति अंतर-रोदन!"

06

लाला के मन में क्या दुविधा है?

लाला किराना दुकानदार है जो दिन-भर गद्दी पर बैठकर कौड़ी-की स्पर्धा में मर-मर कर भी परिवार नहीं पाल पाता। वह सोचता है—"रोक दिए हैं किसने उसकी / जीवन उन्नति के सब साधन?"—और व्यवस्था में परिवर्तन की कल्पना करता है।

07

कविता में सामाजिक समानता की कल्पना कैसे व्यक्त हुई है?

कवि कल्पना करता है कि "कर्म और गुण के समान ही / सकल आय-व्यय का हो वितरण", "जन विमुक्त हो जन-शोषण से, / हो समाज अधिकारी धन का" और "जन का श्रम जन में बँट जाए, / प्रजा सुखी हो देश देश की!"—ये सब पंक्तियाँ सामाजिक समानता की कल्पना व्यक्त करती हैं।

08

पंत जी को कौन-कौन से पुरस्कार मिले थे?

पंत जी को सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुए।

09

Sumitranandan Pant ka janm kahan hua tha?

सुमित्रनंदन पंत का जन्म अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड के कौसानी गाँव में हुआ था।

10

"दरिद्रता पापों की जननी" पंक्ति का भाव क्या है?

इस पंक्ति में कवि कहता है कि दरिद्रता ही पापों को जन्म देती है—"दरिद्रता पापों की जननी, / मिटें जनों के पाप, ताप, भय"—अर्थात् यदि दरिद्रता मिटे तो लोगों के पाप और भय भी मिटेंगे।

11

कविता का अंत किस दृश्य से होता है?

कविता का अंत इस यथार्थपूर्ण दृश्य से होता है: "टूट गया वह स्वप्न वणिक का, / आई जब बुढ़िया बेचारी, / आध-पाव आटा लेने / लो, लाला ने फिर डंडी मारी!"—लाला के सारे समानता के स्वप्न टूट जाते हैं।

12

ग्राम्या संकलन का मूल स्वर क्या है?

ग्राम्या का मूल स्वर ग्रामीण जन-जीवन के विविध सामाजिक यथार्थ से जुड़ता है।

13

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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