Chapter 10 — Khelen Mein Ko Kaako Gusaaiyaan, Murli Tau Gopalhin Bhaavati
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NCERT Class 11 Hindi Antra Khelen Mein Ko Kaako Gusaaiyaan, Murli Tau Gopalhin Bhaavati — ये सूरदास (सन् 1478-1583) के दो पद हैं जो NCERT कक्षा 11 हिंदी अंतरा पाठ्यपुस्तक में संकलित हैं। पहले पद में कृष्ण की बाल-लीला का बाल-मनोवैज्ञानिक चित्रण है तथा दूसरे पद में गोपियाँ मुरली के प्रति अपना ईर्ष्या-भाव व्यक्त करती हैं।
सूरदास रचित इन दो ब्रजभाषा पदों में कृष्ण-लीला का सजीव चित्रण है। पहले पद में खेल के दौरान श्रीदामा से हार जाने पर कृष्ण रूठ जाते हैं; ग्वाल-बाल उन्हें तर्क देते हैं कि जाति-पाँति में वे बड़े नहीं और रूठने पर कोई साथ नहीं खेलेगा। अंततः कृष्ण नंद बाबा की दुहाई देकर दाँव स्वीकार करते हैं। दूसरे पद में गोपियाँ सखियों से कहती हैं कि मुरली कृष्ण को नाना भाँति नचाती है, कमर टेढ़ी करवाती है, उनके अधरों पर सोती है और गोपियों को कृष्ण का कोप-भाजन बनवाती है।
Key points & formulas
- 01कवि-परिचय: सूरदास (सन् 1478-1583), जन्म-स्थान रुनकता/रेणुका क्षेत्र, जिला आगरा, उत्तर प्रदेश; महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य; पुष्टिमार्गी संप्रदाय के 'अष्टछाप' कवियों में सर्वाधिक प्रसिद्ध।
- 02विधा एवं भाषा: ब्रजभाषा के गेय पद; सभी पद किसी न किसी राग से संबंधित हैं; सूरसागर को राग-सागर भी कहा जाता है; प्रमुख कृतियाँ — सूरसागर, सूरसारावली, साहित्यलहरी।
- 03पद 1 का केंद्रीय भाव: खेल में श्रीदामा से हार जाने पर कृष्ण बरबस (व्यर्थ ही) रूठ जाते हैं; ग्वाल-बाल तर्क देते हैं; अंत में कृष्ण नंद-दुहैयाँ देकर दाँव स्वीकार करते हैं — बाल-मनोविज्ञान का सूक्ष्म चित्रण।
- 04पद 2 का केंद्रीय भाव: गोपियाँ सखी से कहती हैं कि मुरली कृष्ण को नाना भाँति नचाती है, एक पाँव पर ठाढ़ा करती है, कमर टेढ़ी करवाती है, गिरिधर की गर्दन झुकवाती है और गोपियों पर उनका कोप करवाती है — गोपियों का ईर्ष्या-भाव प्रकट होता है।
- 05काव्य-विशेषता: उपमा, उत्प्रेक्षा और रूपक का कुशल प्रयोग; सूरदास मुख्यतः वात्सल्य और शृंगार के कवि हैं; काव्य और संगीत का अपूर्व संगम।
- 06कठिन शब्दार्थ: गुसैयाँ = स्वामी/गुसाईं; बरबस = व्यर्थ ही; रिसैयाँ = क्रोध करना; कनौड़े = कृपा से दबे हुए; गिरिधर = गिरि धारण करने वाले (श्रीकृष्ण); कोप = क्रोध; कटि = कमर; दाउँ दियौ = दाँव देना/पारी देना।
Frequently asked questions
01खेलन में को काको गुसैयाँ पद में कृष्ण और किसके बीच विवाद हुआ?
इस पद में कृष्ण (हरि) और श्रीदामा के बीच विवाद हुआ। हरि हारे और श्रीदामा जीते, परंतु कृष्ण बरबस (व्यर्थ ही) रिसैयाँ (क्रोध) करने लगे और हार स्वीकार नहीं की।
02ग्वाल-बालों ने कृष्ण को रूठने पर क्या-क्या तर्क दिए?
साथियों ने कहा — जाति-पाँति में तुम हमसे बड़े नहीं; हम तुम्हारी छाया में नहीं रहते; तुम्हारी अधिकता केवल अधिक गायों के कारण है; जो रूठेगा उसके साथ कोई नहीं खेलेगा और ग्वाले जहाँ-तहाँ बैठे रह जाएंगे।
03कृष्ण ने नंद बाबा की दुहाई देकर दाँव क्यों दिया?
सूरदास लिखते हैं कि कृष्ण खेलना चाहते थे ('प्रभु खेल्यौइ चाहत'), इसलिए उन्होंने नंद-दुहैयाँ (नंद बाबा का नाम लेकर) दाँव (पारी) दिया — यह बाल-मनोविज्ञान का सूक्ष्म और स्वाभाविक चित्रण है।
04Murli Tau Gopalhi Bhaavati pad mein gopis ki kya bhaavna hai?
इस पद में गोपियाँ अपनी सखियों से मुरली के प्रति ईर्ष्या-भाव व्यक्त करती हैं। मुरली कृष्ण को नचाती है, उनके अधरों पर विराजती है और गोपियों को कृष्ण का कोप-भाजन बनवाती है।
05मुरली कृष्ण को किस प्रकार वश में करती है?
पद के अनुसार मुरली कृष्ण को नाना भाँति नचाती है, एक पाँव पर ठाढ़ौ (खड़ा) करती है, कोमल तन से आज्ञा करवाती है, कटि (कमर) टेढ़ी करवाती है और गिरिधर की नार (गर्दन) झुकवाती है।
06'गिरिधर नार नवावति' का क्या अर्थ है?
यहाँ 'नार' का अर्थ है गर्दन और 'गिरिधर' का अर्थ है गिरि (पर्वत) धारण करने वाले श्रीकृष्ण। अर्थात् मुरली उन कृष्ण की भी गर्दन झुकवा देती है जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया था।
07कृष्ण के अधरों की तुलना सेज से क्यों की गई है?
पद में कहा गया है कि मुरली 'आपुन पौंिढ़ अधर सज्जा पर' — अर्थात् वह स्वयं कृष्ण के अधर (ओठ) रूपी सज्जा (सेज) पर लेटती है। इसी से गोपियों को मुरली से ईर्ष्या होती है।
08सूरदास की भाषा कौन-सी है और उनके प्रमुख काव्य-ग्रंथ कौन-से हैं?
सूरदास की भाषा ब्रजभाषा है। उनके प्रमुख काव्य-ग्रंथ हैं — सूरसागर (जिसे राग-सागर भी कहते हैं), सूरसारावली और साहित्यलहरी।
09सूरदास किस संप्रदाय और किनके शिष्य थे?
सूरदास पुष्टिमार्गी संप्रदाय के 'अष्टछाप' कवियों में सर्वाधिक प्रसिद्ध थे और महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य थे।
10'बरबस' और 'कनौड़े' शब्दों का अर्थ क्या है?
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार 'बरबस' का अर्थ है व्यर्थ ही, और 'कनौड़े' का अर्थ है कृपा से दबे हुए।
11इस पाठ से बाल-मनोविज्ञान पर क्या प्रकाश पड़ता है?
पहले पद में बाल-मनोविज्ञान का सूक्ष्म चित्रण है — बच्चे खेल में हारने पर रूठ जाते हैं, हार नहीं मानते, परंतु खेलने की इच्छा उन्हें मना लेती है। कृष्ण भी अंत में नंद बाबा की दुहाई देकर दाँव दे देते हैं।
12Surdas ke pad mein goopiyon ki murli ke prati kya feeling hai?
गोपियाँ मुरली से ईर्ष्या करती हैं क्योंकि मुरली सदा कृष्ण के निकट रहती है, उन्हें नचाती है और उनके अधरों पर विराजती है। वह गोपियों पर कृष्ण का कोप भी करवाती है — 'भुकुटी कुटिल, नैन नासा-पुट, हम पर कोप-करावति।'
13क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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