Class 11 Hindi

Chapter 11 — Hasi Ki Chot Sapna Darbar

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Overview

Summary

NCERT Class 11 Hindi Antra Hasi Ki Chot Sapna Darbar — ये तीन कविताएँ रीतिकालीन कवि देव (देवदत्त द्विवेदी, सन् 1673-1767) द्वारा रचित हैं, जो क्रमशः विप्रलंभ शृंगार, स्वप्न-विरह और दरबारी चाटुकारिता पर केंद्रित हैं।

रीतिकालीन कवि देव का जन्म इटावा, उत्तर प्रदेश में हुआ था और इनका पूरा नाम देवदत्त द्विवेदी था। इस पाठ में तीन कविताएँ संकलित हैं। 'हँसी की चोट' विप्रलंभ शृंगार का उदाहरण है — कृष्ण के हँसकर मुख फेर लेने से गोपी के पंच तत्त्वों में केवल आकाश तत्त्व शेष रह जाता है। 'सपना' में कृष्ण स्वप्न में गोपी को झूला झूलने बुलाते हैं, किंतु नींद टूटते ही संयोग-वियोग का मार्मिक चित्र उभरता है। 'दरबार' में पतनशील और निष्क्रिय सामंती व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य है — साहिब अंधे, दरबारी मूक, सभा बहिरी।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि परिचय: देव (देवदत्त द्विवेदी), जन्म इटावा उत्तर प्रदेश, काल सन् 1673-1767; रीतिकालीन कवि; 52 से 72 ग्रंथों के रचयिता (रसविलास, भावविलास, काव्यरसायन, प्रेमदीपिका आदि)।
  2. 02विधा: सवैया और कवित्त — इस पाठ में तीन कविताएँ (हँसी की चोट, सपना, दरबार)।
  3. 03'हँसी की चोट': विप्रलंभ शृंगार का उदाहरण — कृष्ण के हँसकर मुख फेर लेने से गोपी के पंच तत्त्वों में केवल आकाश तत्त्व शेष रहता है; वह मिलने की आस पर ही जीवित है।
  4. 04'सपना': संयोग-वियोग का मार्मिक चित्रण — कृष्ण स्वप्न में झूला झूलने को बुलाते हैं, निगोड़ी नींद टूट जाती है, 'आँख खोलि देखौं तौ न घन हैं, न घनश्याम'।
  5. 05'दरबार': पतनशील और निष्क्रिय सामंती व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया — 'साहिब अंध, मुसाहिब मूक, सभा बहिरी'; कला और गुणग्राहकता की उपेक्षा।
  6. 06देव में अनुप्रास और यमक के प्रति प्रबल आकर्षण है; ध्वनि-योजना छंदों में पग-पग पर प्राप्त होती है; शृंगार के उदात्त रूप का चित्रण।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: तनुता = कृशता/दुबलापन; निगोड़ी = निर्दयी; मुसाहिब = राजा के दरबारी; औघट = कठिन दुर्गम मार्ग; सगरी = संपूर्ण।
Questions

Frequently asked questions

01

हँसी की चोट कविता में देव ने किन पंच तत्त्वों का वर्णन किया है और वे वियोग में कैसे विदा होते हैं?

पाठ के अनुसार गोपी के वियोग में साँसों के साथ समीर (वायु), आँसुओं के साथ नीर (जल), तेज (अग्नि) गुण लेकर और भूमि (पृथ्वी) तन की तनुता करके विदा हो जाती है — केवल आकाश तत्त्व शेष रहता है। वह मिलने की आस पर जीवित है।

02

Dev ki kavita 'Hasee ki Chot' ka kendriya bhaav kya hai?

यह विप्रलंभ शृंगार का उदाहरण है। जिस दिन से कृष्ण ने हँसकर मुख फेर लिया, गोपी हँसना ही भूल गई। वे कृष्ण को खोज-खोज कर हार गई हैं और अब केवल मिलने की आशा पर जीवित हैं।

03

'सपना' कवित्त में नायिका क्यों प्रसन्न थी और सपना कैसे टूट गया?

स्वप्न में कृष्ण ने गोपी को झूला झूलने के लिए बुलाया था जिससे वह फूली न समाई और मगन हो गई। किंतु 'चाहत उठ्योई उठि गई सो निगोड़ी नींद' — उठने की तैयारी करते ही नींद टूट गई; 'आँख खोलि देखौं तौ न घन हैं, न घनश्याम', केवल आँसू बचे।

04

NCERT Class 11 Hindi Antra Hasi Ki Chot Sapna Darbar — 'दरबार' सवैये में किस वातावरण का चित्रण है?

पाठ के अनुसार 'साहिब अंध, मुसाहिब मूक, सभा बहिरी' — स्वामी अंधे हैं, दरबारी चुप हैं, सभा बहरी है। देव ने यहाँ पतनशील और निष्क्रिय सामंती व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है जहाँ गुणग्राहकता और कला की परख अनदेखी की जाती है।

05

देव का परिचय और उनकी प्रमुख रचनाएँ क्या हैं?

देव (देवदत्त द्विवेदी) का जन्म इटावा, उत्तर प्रदेश में हुआ (सन् 1673-1767)। उनके कुल ग्रंथों की संख्या 52 से 72 तक मानी जाती है। प्रमुख रचनाएँ: रसविलास, भावविलास, भवानीविलास, कुशलविलास, अष्टयाम, सुमिलविनोद, सुजानविनोद, काव्यरसायन, प्रेमदीपिका।

06

'हेरि हियो जु लियो हरि जू हरि' — इस पंक्ति का भाव क्या है?

इस पंक्ति में 'हरि' के दो अर्थ हैं — कृष्ण और हरने वाला। भाव यह है कि जिस दिन से कृष्ण ने हँसकर मुख फेरा, उन्होंने देखकर ही गोपी का हृदय हर लिया।

07

'सोए गए भाग मेरे जानि वा जगन में' — भाव स्पष्ट करें।

गोपी कहती है कि उस जागने (नींद टूटने) के क्षण में मेरे भाग्य सो गए — अर्थात् जब नींद टूटी तभी कृष्ण के साथ झूला झूलने का सुखद स्वप्न भी नष्ट हो गया।

08

देव की काव्य-भाषा और शिल्प की क्या विशेषता है?

पाठ के अनुसार देव में अनुप्रास और यमक के प्रति प्रबल आकर्षण है। अनुप्रास द्वारा उन्होंने सुंदर ध्वनि-चित्र खींचे हैं और ध्वनि-योजना उनके छंदों में पग-पग पर प्राप्त होती है। उन्होंने शृंगार के उदात्त रूप का चित्रण किया है।

09

Sapna kavitt mein 'jhahri-jhahri' ka kya arth hai?

पाठ के शब्दार्थ के अनुसार 'झहरि' का अर्थ है बरसाती बूँदों की झड़ी लगना। 'झहरि-झहरि झीनी बूँद हैं परति मानो, घहरि-घहरि घटा घेरी है गगन में' — यह कृष्ण (घनश्याम) के आगमन के वातावरण का चित्र है।

10

'निगोड़ी नींद' से क्या तात्पर्य है?

पाठ के शब्दार्थ के अनुसार 'निगोड़ी' का अर्थ है निर्दयी। 'चाहत उठ्योई उठि गई सो निगोड़ी नींद' — वह निर्दयी नींद जो कृष्ण के साथ झूला झूलने के सुखद स्वप्न को तोड़ गई।

11

देव ने राजदरबारों का जीवन किस रूप में देखा था?

पाठ के अनुसार अनेक आश्रयदाता राजाओं, नवाबों, धनिकों से संबद्ध रहने के कारण देव ने राजदरबारों का आडंबरपूर्ण और चाटुकारिता भरा जीवन बहुत निकट से देखा था, इसीलिए उन्हें ऐसे जीवन से वितृष्णा हो गई थी।

12

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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