Class 11 Hindi

Chapter 5 — Jyotiba Phule

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Overview

Summary

NCERT Class 11 Hindi Antra Jyotiba Phule — यह पाठ लेखिका सुधा अरोड़ा (जन्म 1948) द्वारा लिखी गई महात्मा ज्योतिबा फुले की जीवनी है, जिसमें फुले दंपती के दलित-शिक्षा, स्त्री-समानता और सामाजिक-धार्मिक रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष का वर्णन किया गया है।

यह पाठ सुधा अरोड़ा द्वारा लिखी गई महात्मा ज्योतिबा फुले की जीवनी है। फुले ने वर्ण, जाति और वर्ग-व्यवस्था में निहित शोषण को चुनौती देते हुए 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की। उन्होंने पत्नी सावित्री बाई को शिक्षित किया और 14 जनवरी 1848 को पुणे में भारत की पहली कन्याशाला खोली। फुले दंपती को समाज के तीखे विरोध, बहिष्कार और पिता द्वारा घर से निकाले जाने का सामना करना पड़ा। 1840 से 1890 तक पचास वर्षों तक दोनों ने एक प्राण होकर दलितों, शोषितों और स्त्रियों के हक की लड़ाई लड़ी। 1888 में उन्हें 'महात्मा' की उपाधि दी गई।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखिका परिचय: सुधा अरोड़ा का जन्म 1948 में लाहौर में हुआ; उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से हुई; प्रमुख कहानी संग्रह हैं — 'बगैर तराशे हुए', 'युद्ध-विराम', 'महानगर की भौतिकी', 'काला शुक्रवार', 'काँसे का गिलास'; 'उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान' द्वारा विशेष पुरस्कार से सम्मानित।
  2. 02विधा: जीवनी — पाठ में ज्योतिबा फुले के जीवन-संघर्ष, विचार और कार्यों का वर्णन है।
  3. 03केंद्रीय भाव: दलितों, शोषितों और स्त्रियों की समानता तथा शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष; ब्राह्मण वर्चस्व और सामाजिक-धार्मिक रूढ़ियों का विरोध; पुरोहितवादी और पूँजीवादी मानसिकता पर हल्ला।
  4. 04प्रमुख ग्रंथ एवं संस्था: 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना; 'गुलामगिरी', 'शेतकर्यांचा आसूड' (किसानों का प्रतिशोध) और 'सार्वजनिक सत्यधर्म' उनके मौलिक विचारों के संग्रह हैं।
  5. 05मुख्य घटनाएँ: सावित्री बाई की बचपन की घटना — लाट साहब द्वारा दी किताब को पिता ने कूड़े में फेंका पर सावित्री ने उसे छिपाकर रखा; 14 जनवरी 1848 को पुणे के बुधवार पेठ में पहली कन्याशाला खुली; सावित्री बाई पढ़ाने जाती तो लोग गालियाँ देते, थूकते, पत्थर मारते और गोबर उछालते; फुले ने अपने घर का पानी का हौद सभी जातियों के लिए खोल दिया।
  6. 06स्त्री-समानता हेतु विवाह-विधि में बदलाव: ज्योतिबा ने विवाह-विधि से ब्राह्मण का स्थान हटाया और नए मंगलाष्टक तैयार किए जिनमें वधू वर से कहती है — 'स्वतंत्रता का अनुभव हम स्त्रियों को है ही नहीं। इस बात की आज शपथ लो कि स्त्री को उसका अधिकार दोगे।'
  7. 07कठिन शब्दार्थ (स्रोत-पाठ से): शुमार = गिनती, शामिल; वर्चस्व = दबदबा, प्रधानता; पर्दाफाश = भंडाफोड़, तथ्य उजागर करना; मिसाल = उदाहरण, आदर्श; पूर्णविराम = किसी बात को खत्म करना; आमादा होना = किसी कार्य को करने के लिए दृढ़ होना।
Questions

Frequently asked questions

01

ज्योतिबा फुले का नाम समाज-सुधारकों की सूची में शुमार क्यों नहीं किया गया?

पाठ के अनुसार वह सूची उच्चवर्णीय समाज के प्रतिनिधियों ने बनाई थी। फुले ब्राह्मण वर्चस्व और सामाजिक मूल्यों को कायम रखने वाली शिक्षा और सुधार के समर्थक नहीं थे, इसलिए उन्हें उस सूची में स्थान नहीं दिया गया।

02

Jyotiba Phule ne kaun si sanstha sthapit ki aur uska kya uddeshya tha?

फुले ने 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की। उनका उद्देश्य पूँजीवादी और पुरोहितवादी मानसिकता का विरोध करना तथा दलितों और स्त्रियों को शोषण-व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन के लिए प्रेरित करना था।

03

ज्योतिबा फुले के आदर्श परिवार की अवधारणा क्या थी?

फुले ने कहा: 'जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है।' उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे।

04

सावित्री बाई के बचपन की वह घटना क्या थी जो पाठ में वर्णित है?

छह-सात साल की उम्र में सावित्री शिखल गाँव के हाट में गई। एक लाट साहब ने उन्हें एक पुस्तक दी। घर आकर सावित्री ने वह पुस्तक पिता को दिखाई तो पिता ने उसे कूड़े में फेंक दिया। सावित्री ने वह पुस्तक उठाकर एक कोने में छिपा दी और 1840 में ज्योतिबा से विवाह के बाद ससुराल ले आई तथा शिक्षित होने पर पढ़ी।

05

Bharat ki pehli kanyashala kab aur kahan khuli?

14 जनवरी 1848 को पुणे के बुधवार पेठ निवासी भिड़े के बाड़े में पहली कन्याशाला की स्थापना हुई। पूरे भारत में लड़कियों की शिक्षा की यह पहली पाठशाला थी।

06

सावित्री बाई को पाठशाला जाते समय किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?

जब सावित्री बाई पढ़ाने के लिए घर से पाठशाला तक जाती थीं, तो रास्ते में खड़े लोग उन्हें गालियाँ देते, थूकते, पत्थर मारते और गोबर उछालते थे। फिर भी दोनों पति-पत्नी सारी बाधाओं से जूझते हुए अपने काम में डटे रहे।

07

Jyotiba Phule ko 'Mahatma' ki upadhi kab mili aur unka kya jawab tha?

1888 में ज्योतिबा फुले को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा: 'मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।'

08

ज्योतिबा फुले के प्रमुख ग्रंथ कौन-कौन से हैं?

उनके मौलिक विचार 'गुलामगिरी', 'शेतकर्यांचा आसूड' (किसानों का प्रतिशोध), और 'सार्वजनिक सत्यधर्म' आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। 1883 में 'शेतकर्यांचा आसूड' के उपोद्घात में उन्होंने लिखा: 'विद्या बिना मति गई, मति बिना नीति गई, नीति बिना गति गई, गति बिना वित्त गया, वित्त बिना शूद्र गए, इतने अनर्थ एक अविद्या ने किए।'

09

स्त्री-शिक्षा के बारे में ज्योतिबा फुले का क्या कहना था?

उन्होंने लिखा: 'स्त्री-शिक्षा के दरवाजे पुरुषों ने इसलिए बंद कर रखे हैं कि वह मानवीय अधिकारों को समझ न पाए। पुरुषों के लिए अलग नियम और स्त्रियों के लिए अलग नियम — यह पक्षपात है।'

10

फुले दंपती ने स्त्री-समानता के लिए विवाह-विधि में क्या परिवर्तन किए?

ज्योतिबा ने स्त्री-समानता को प्रतिष्ठित करने वाली नई विवाह-विधि बनाई। पूरी विवाह-विधि से उन्होंने ब्राह्मण का स्थान हटाया और नए मंगलाष्टक तैयार किए जिनमें वधू वर से कहती है: 'स्वतंत्रता का अनुभव हम स्त्रियों को है ही नहीं। इस बात की आज शपथ लो कि स्त्री को उसका अधिकार दोगे।'

11

इस पाठ की लेखिका सुधा अरोड़ा कौन हैं?

सुधा अरोड़ा का जन्म 1948 में लाहौर में हुआ। उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से हुई। वे मूलतः कथाकार हैं। उनके कहानी संग्रहों में 'बगैर तराशे हुए', 'युद्ध-विराम', 'महानगर की भौतिकी', 'काला शुक्रवार', 'काँसे का गिलास' प्रमुख हैं। 'उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान' ने उन्हें विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया।

12

Jyotiba aur Savitribai Phule ka dampaty jeevan aaj ke liye kyon prernadata hai?

1840 से 1890 तक पचास वर्षों तक दोनों ने एक प्राण होकर अपने मिशन को पूरा किया। उन्होंने बालहत्या प्रतिबंधक गृह खोला, अपने घर का पानी का हौद सभी जातियों के लिए खोला और महार, चमार, मांग जाति के लोगों की झुग्गियों में जाकर लड़कियों को पाठशाला भेजने का आग्रह किया — हर काम पति-पत्नी ने कंधे-से-कंधा मिलाकर किया।

13

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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