Summary
NCERT Class 12 Hindi Antra Jahan Koi Waapsi Nahi निर्मल वर्मा द्वारा लिखित एक यात्र-वृत्तांत है जो 'धुंध से उठती धुन' संग्रह से लिया गया है; इसमें सिगरौली के नवागाँव क्षेत्र में औद्योगीकरण के कारण होने वाले विस्थापन और पर्यावरण-विनाश का मार्मिक चित्रण है।
लेखक निर्मल वर्मा 1983 में 'लोकायन' संस्था की ओर से सिगरौली के नवागाँव क्षेत्र में जाते हैं। अमझर गाँव में अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद आम के पेड़ सूखने लगे हैं। धान रोपती ग्रामीण स्त्रियों के सजीव दृश्य के बरक्स लेखक यह चिंता व्यक्त करते हैं कि औद्योगीकरण इस सब को मटियामेट कर देगा। रिहंद बाँध से लेकर कोयला खदानों तक विस्थापन की कई लहरें आ चुकी हैं। लेखक बताते हैं कि प्राकृतिक विपदा के बाद लोग घर लौट सकते हैं, किंतु औद्योगीकरण की आँधी में विस्थापित लोग कभी नहीं लौट सकते — ये 'आधुनिक शरणार्थी' हैं।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: निर्मल वर्मा (1929–2005), जन्म शिमला; नयी कहानी आंदोलन के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर; 1985 में 'कव्वे और काला पानी' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार।
- 02विधा व स्रोत: यात्र-वृत्तांत; 'धुंध से उठती धुन' यात्र-संस्मरण संग्रह से लिया गया; रचनाकाल 1983 (सिगरौली)।
- 03केंद्रीय भाव: अंधाधुंध औद्योगीकरण से पर्यावरण-विनाश और ग्रामीण जन का स्थायी विस्थापन; लेखक का मत है कि प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का 'नाजुक संतुलन' नष्ट हो रहा है।
- 04मुख्य स्थान व घटनाएँ: नवागाँव (50,000 की आबादी, लगभग 18 गाँव) का अमझर गाँव — अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद आम के पेड़ सूख गए; रिहंद बाँध निर्माण से पहली विस्थापन-लहर; बाद में सेंट्रल कोल फील्ड और NTPC की स्थापना।
- 05पेड़ों का मूक सत्याग्रह: लेखक लिखते हैं — 'आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?' — मनुष्य के विस्थापन के विरोध में पेड़ों का सूखना एक विचित्र अनुभव बताया गया है।
- 06आधुनिक शरणार्थी: औद्योगीकरण से उजड़े लोग 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' हैं — प्राकृतिक आपदा के बाद लोग लौट सकते हैं, किंतु विकास के नाम पर उन्मूलित लोग 'फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते।'
- 07कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): विस्थापन = अपने निवास स्थान से बलपूर्वक हटाना/उजाड़ना; उन्मूलित = अपने मूल से कटना; शाश्वत = निरंतर, कभी न मिटने वाला; लोलुप = लालची; झंझावात = मुसीबत/परेशानी।
Frequently asked questions
01Jahan Koi Waapsi Nahi ke lekhak kaun hain?
इस यात्र-वृत्तांत के लेखक निर्मल वर्मा (1929–2005) हैं, जिनका जन्म शिमला (हिमाचल प्रदेश) में हुआ था।
02'जहाँ कोई वापसी नहीं' किस संग्रह से लिया गया है?
यह पाठ निर्मल वर्मा के यात्र-संस्मरण संग्रह 'धुंध से उठती धुन' से लिया गया है।
03अमझर गाँव का क्या अर्थ है और वहाँ सूनापन क्यों है?
अमझर का अर्थ है — आम के पेड़ों से घिरा गाँव जहाँ आम झरते हैं। जब से अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के गाँव उजाड़े जाने की सरकारी घोषणा हुई, तब से आम के पेड़ सूखने लगे — न फल पकते हैं, न कुछ नीचे झरता है।
04इस पाठ में 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' किन्हें कहा गया है?
औद्योगीकरण के झंझावात ने जिन लोगों को उनकी घर-जमीन से उखाड़कर हमेशा के लिए निर्वासित कर दिया है, उन्हें 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' कहा गया है।
05प्रकृति के कारण विस्थापन और औद्योगीकरण के कारण विस्थापन में क्या अंतर बताया गया है?
बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के बाद लोग कुछ अरसे के लिए घर छोड़ते हैं और आफत टलने पर वापस लौट भी आते हैं। किंतु विकास और प्रगति के नाम पर होने वाले विस्थापन में लोग फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते और उनका परिवेश व आवास स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं।
06पेड़ों के मूक सत्याग्रह से लेखक का क्या तात्पर्य है?
लेखक ने देखा कि अमझर में अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद आम के पेड़ सूखने लगे। उन्होंने इसे 'मनुष्य के विस्थापन के विरोध में पेड़ों का मूक सत्याग्रह' कहा है — अर्थात पेड़ भी मानो जानते हैं कि जब आदमी उजड़ेगा तो वे जीवित रहकर क्या करेंगे।
07लेखक के अनुसार स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी क्या है?
लेखक के अनुसार ट्रेजेडी यह है कि पश्चिम की देखादेखी में योजनाएँ बनाते समय — प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है — इस ओर पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया।
08यूरोप और भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएँ किस प्रकार भिन्न हैं?
पाठ के अनुसार यूरोप में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य और भूगोल के बीच संतुलन बनाए रखने का है, जबकि भारत में यही प्रश्न मनुष्य और उसकी संस्कृति के बीच पारंपरिक संबंध बनाए रखने का हो जाता है — क्योंकि भारत की सांस्कृतिक विरासत संग्रहालयों में नहीं, मनुष्य और उसकी धरती-नदी-जंगल के रिश्तों में जीवित थी।
09सिगरौली का नाम कहाँ से आया है?
पाठ में उल्लेख है कि एक पुरानी दंतकथा के अनुसार सिगरौली का नाम 'सृंगावली' पर्वतमाला से निकला है, जो पूर्व-पश्चिम में फैली है।
10'कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है' — इसका क्या आशय है?
लेखक का तात्पर्य है कि सिगरौली की अपार खनिज संपदा को देखकर ही दिल्ली के सत्ताधारियों और उद्योगपतियों की आँखें उसकी ओर गईं और परिणामस्वरूप वहाँ के वनवासियों व किसानों को उनकी उर्वरा भूमि व जंगलों से उखाड़ दिया गया।
11लेखक सिगरौली किस संस्था की ओर से गए थे?
लेखक दिल्ली में स्थित 'लोकायन' संस्था की ओर से सिगरौली गए थे — विकास के 'उजले' पहलू के पीछे के विनाश का जायजा लेने।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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