Summary
NCERT Class 12 Hindi Antra Gandhi, Nehru Aur Yasser Arafat भीष्म साहनी (1915–2003) की आत्मकथा 'आज के अतीत' का एक संस्मरण है, जिसमें लेखक ने गांधी जी, नेहरू जी और यास्सेर अराफ़ात के साथ बिताए अविस्मरणीय क्षणों को शब्दबद्ध किया है।
भीष्म साहनी ने इस संस्मरण में तीन महान व्यक्तित्वों के साथ बिताए क्षणों को प्रस्तुत किया है। सन् 1938 के आसपास सेवाग्राम में भाई बलराज के पास गए लेखक को गांधी जी के साथ प्रातः भ्रमण तथा एक बीमार बालक के प्रति बापू के सहज व्यवहार का साक्षी बनने का अवसर मिला। काश्मीर प्रवास में लेखक ने नेहरू जी को नजदीक से देखा — खाने की मेज पर अनातोले फ्रांस की एक मार्मिक कहानी और अखबार का विनम्र प्रसंग उल्लेखनीय हैं। तीसरा प्रसंग ट्यूनिस में यास्सेर अराफ़ात के सदरमुकाम में भोजन का है, जहाँ अराफ़ात ने गर्मजोशी भरे आतिथ्य से लेखक का मन जीत लिया।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: भीष्म साहनी (1915–2003) का जन्म रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ; 'तमस' उपन्यास के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा हिंदी अकादमी दिल्ली का शलाका सम्मान मिला।
- 02विधा: यह पाठ संस्मरण है — आत्मकथा 'आज के अतीत' का एक अंश।
- 03केंद्रीय भाव: राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री — तीनों महान व्यक्तित्वों की सरलता और मानवीयता इस संस्मरण का प्राण है।
- 04सेवाग्राम प्रसंग (सन् 1938): लेखक भाई बलराज (जो 'नयी तालीम' पत्रिका के सह-संपादक थे) के पास सेवाग्राम गए; गांधी जी के साथ प्रातः भ्रमण किया; एक बीमार बालक की 'बापू-बापू' पुकार पर गांधी जी तत्काल पहुँचे और हँसते हुए उसकी सहायता की — उनके चेहरे पर 'लेशमात्र भी क्षोभ का भाव नहीं था'।
- 05काश्मीर प्रसंग: शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी पर सातवें पुल से अमीराकदल तक नावों में नेहरू जी की शोभायात्रा हुई; खाने की मेज पर नेहरू जी ने फ्रांसीसी लेखक अनातोले फ्रांस की गरीब बाजीगर की कहानी सुनाई; 'आपने देख लिया हो तो क्या मैं एक नजर देख सकता हूँ?' — अखबार माँगने का यह विनम्र वाक्य नेहरू जी के सौम्य व्यक्तित्व को उजागर करता है।
- 06ट्यूनिस प्रसंग: अफ्रो-एशियाई लेखक संघ के सम्मेलन के दौरान लेखक और उनकी पत्नी को यास्सेर अराफ़ात के सदरमुकाम में दोपहर के भोजन पर आमंत्रित किया गया; अराफ़ात ने फल छील-छीलकर खिलाए और शहद की चाय बनाई; गांधी जी का उल्लेख होने पर अराफ़ात बोले — 'वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।'
- 07कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): प्रदक्षिणा = परिक्रमा; क्षोभ = रोषयुक्त असंतोष; सदरमुकाम = राजधानी; दत्तचित = एकाग्र, जिसका मन किसी कार्य में अच्छी तरह लगा हो; लब्धप्रतिष्ठ = प्रसिद्धि प्राप्त।
Frequently asked questions
01यह पाठ किस विधा का है और किस रचना से लिया गया है?
यह पाठ संस्मरण विधा का है। यह भीष्म साहनी की आत्मकथा 'आज के अतीत' का एक अंश है।
02Bhishma Sahni kaun the? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
भीष्म साहनी (1915–2003) का जन्म रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ। उन्होंने गवर्नमेंट कालेज लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. और पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की। 'तमस' उपन्यास के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। वे लगभग सात वर्ष मास्को में अनुवादक भी रहे।
03लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?
यह सन् 1938 के आसपास की बात है, जिस साल कांग्रेस का हरिपुरा अधिवेशन हुआ था। लेखक अपने भाई बलराज साहनी के पास कुछ दिन बिताने सेवाग्राम गए थे। बलराज वहाँ 'नयी तालीम' पत्रिका के सह-संपादक थे।
04गांधी जी ने बीमार बालक के साथ कैसा व्यवहार किया?
एक लड़का खोखे के पीछे 'बापू को बुलाओ, मैं मर जाऊँगा' कहकर हाथ-पैर पटक रहा था। गांधी जी उसके पास पहुँचे, उसके फूले हुए पेट पर हाथ फेरा, समझ गए कि उसने अधिक ईख पी ली है, और हँसते हुए बोले 'तू तो पागल है।' उन्होंने उसे उँगली डालकर उल्टी करवाई और लिटा दिया। उनके चेहरे पर लेशमात्र भी क्षोभ का भाव नहीं था।
05काश्मीर में नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार हुआ?
शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी पर, शहर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक, सातवें पुल से अमीराकदल तक, नावों में नेहरू जी की शोभायात्रा हुई। नदी के दोनों ओर हजारों-हजार काश्मीर निवासी अदम्य उत्साह के साथ उनका स्वागत कर रहे थे।
06नेहरू जी ने खाने की मेज पर कौन-सी कहानी सुनाई और किस प्रसंग में?
रामेश्वरी नेहरू और जवाहरलाल जी के बीच धर्म पर बहस होने के बाद नेहरू जी ने फ्रांस के विख्यात लेखक अनातोले फ्रांस की कहानी सुनाई। इसमें एक गरीब बाजीगर, जिसके पास माता मरियम को देने के लिए कोई उपहार नहीं है, गिरजे में जाकर उन्हें अपने करतब भेंट करता है। माता मरियम अपनी मूर्ति से उतरकर उसके माथे का पसीना पोंछने लगती हैं।
07अखबार वाली घटना क्या थी? इससे नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता स्पष्ट होती है?
लेखक के हाथ में अखबार था और नेहरू जी उसके इंतजार में चुपचाप खड़े रहे। जब लेखक ने अखबार नहीं दिया, तो नेहरू जी धीरे से बोले — 'आपने देख लिया हो तो क्या मैं एक नजर देख सकता हूँ?' इस घटना से नेहरू जी की विनम्रता और सौम्यता स्पष्ट होती है।
08लेखक की Yasser Arafat से मुलाकात कहाँ और किन परिस्थितियों में हुई?
ट्यूनीसिया की राजधानी ट्यूनिस में अफ्रो-एशियाई लेखक संघ के सम्मेलन के दौरान 'लोटस' पत्रिका के तत्कालीन संपादक ने लेखक और उनकी पत्नी को यास्सेर अराफ़ात के सदरमुकाम में दोपहर के भोजन पर आमंत्रित किया। उस समय ट्यूनिस में ही फिलिस्तीनी अस्थायी सरकार का सदरमुकाम था।
09अराफ़ात ने किस प्रकार आतिथ्य का परिचय दिया?
अराफ़ात लेखक और उनकी पत्नी के साथ बैठे, बातों का सिलसिला शुरू किया, फल छील-छीलकर खिलाए, शहद की चाय बनाई, और भोजन के बाद जब लेखक गुसलखाने से बाहर निकले तो अराफ़ात तौलिया हाथ में लिए बाहर खड़े थे।
10'वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं' — यह किसने, किसके बारे में और किस संदर्भ में कहा?
यह वाक्य यास्सेर अराफ़ात ने कहा। जब लेखक ने गांधी जी और भारत के अन्य नेताओं का जिक्र किया, तो अराफ़ात बोले — 'वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।' इससे गांधी जी के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और सार्वभौमिक सम्मान का बोध होता है।
11सेवाग्राम में लेखक को और कौन-कौन से प्रसिद्ध व्यक्ति देखने को मिले?
सेवाग्राम में लेखक को पृथ्वीसिंह आजाद (जिन्होंने हथकड़ियों समेत भागती रेलगाड़ी से छलांग लगाई थी), मीरा बेन, खान अब्दुल गफ्फार खान और कुछ दिन के लिए राजेंद्र बाबू देखने को मिले। कस्तूरबा गांधी प्रार्थना सभा में पालथी मारकर बैठती थीं।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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