Vedamritam
NCERT Class 11 Sanskrit Shashwati Vedamritam — यह पाठ ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद से संकलित छह वैदिक मंत्रों का पद्य-संग्रह है, जो संगठन, मानसिक एकता, प्रकृति-माधुर्य, शिवसंकल्प और मातृभूमि-स्तुति के उदात्त आदर्श प्रस्तुत करता है। इस पाठ का कोई एक लेखक नहीं है — मंत्र सीधे वेदों से लिए गए हैं।
- 1पाठ का स्रोत एवं विधा: यह तीन वेदों — ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद — से चुने गए छह मंत्रों का पद्य-संग्रह है; कोई एक कवि या लेखक नहीं।
- 2केंद्रीय भाव: विश्वशान्ति, विश्वबन्धुत्व, एकता, निर्भयता, प्रकृति की मधुरता और राष्ट्रप्रेम — ये वैदिक काव्य के मूल संदेश हैं जो पाठ्यपुस्तक के आमुख में स्पष्ट रेखांकित हैं।
- 3ऋग्वेद (10-191) के दो मंत्रों में समाज को एकजुट होकर चलने, परस्पर विरोध छोड़कर एक स्वर में बोलने और हृदय-आकूति-मन को समान रखने का आह्वान है — जैसे पूर्वकाल के देवता एकमत होकर हवि ग्रहण करते थे।
- 4प्रमुख श्लोक (ऋग्वेद 1-90-7): «मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥» — भावार्थ: यजमान के लिए वायु मधुर बहे, नदियाँ और समुद्र मधुर प्रवाहित हों, हमारी ओषधियाँ भी मधुरता-युक्त हों।
- 5प्रमुख श्लोक (यजुर्वेद 36-24): «पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतम्। शृणुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतम् अदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात्॥» — भावार्थ: हम सौ वर्ष देखें, जिएँ, सुनें, बोलें और दीनता-रहित रहें — बार-बार सौ वर्षों से भी अधिक।

