SanskritClass 11

Bhaswati

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01

Kushalprashasanam

NCERT Class 11 Sanskrit Bhaswati Kushalprashasanam — यह पाठ महर्षि वाल्मीकि रचित वाल्मीकिरामायण के अयोध्याकाण्ड के सौवें सर्ग से संकलित पद्य-अंश है, जिसमें श्रीराम भरत से राज्यव्यवस्था एवं कुशल प्रशासन सम्बन्धी प्रश्न करते हैं।

  • 1पाठ का स्रोत: महर्षि वाल्मीकि रचित वाल्मीकिरामायण, अयोध्याकाण्ड, सौवाँ सर्ग — पद्य (श्लोक) विधा।
  • 2केंद्रीय भाव: श्रीराम भरत को कुशल प्रशासन के सूत्र देते हैं — योग्य मन्त्री, गुप्त मन्त्रणा, समयबद्ध कार्य और न्यायसंगत वेतन राज्य की सफलता की कुंजी हैं।
  • 3मुख्य पात्र: श्रीराम (प्रश्नकर्ता), भरत (राज्य का संचालक, श्रोता)।
  • 4प्रमुख श्लोक (श्लोक 4): 'कच्चिदात्मसमाः शूराः श्रुतवन्तो जितेन्द्रियाः। कुलीनाश्चेघ्गितज्ञाश्च कृतास्ते तात मन्त्रिणः॥' — भावार्थ: क्या तुमने अपने समान वीर, शास्त्रज्ञ, जितेन्द्रिय, कुलीन और इशारे को समझने वाले मन्त्री नियुक्त किए हैं?
  • 5प्रमुख श्लोक (श्लोक 5): 'मन्त्रे विजयमूलं हि राज्ञां भवति राघव!। सुसंवृतो मन्त्रिधुरैरमात्यैः शास्त्रकोविदैः॥' — भावार्थ: राजाओं की विजय का मूल मन्त्रणा (सुविचारित परामर्श) में निहित है, जब शास्त्रज्ञ मन्त्रियों से घिरे हों।

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