Class 8 Hindi

Chapter 6 — एक टोकरी भर मिट्टी

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Overview

Summary

'Ek Tokri Bhar Mitti' Class 8 Hindi (Malhar) ki ek kahani hai, jiske lekhak Madhavrao Sapre hain — एक निर्धन वृद्धा एक टोकरी मिट्टी के प्रतीक द्वारा घमंडी ज़मींदार को उसके अन्याय का बोध कराती है और अपनी छिनी हुई झोंपड़ी वापस पा लेती है।

एक धनी ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए वकीलों की सहायता से अदालती कब्जा करके एक निर्धन वृद्धा को उसकी झोंपड़ी से बेदखल कर देता है। बेदखल होने पर वृद्धा की पोती खाना छोड़ देती है। एक दिन वृद्धा पोती के लिए चूल्हा बनाने हेतु झोंपड़ी की मिट्टी की एक टोकरी ले जाने की विनती करती है। जब ज़मींदार स्वयं टोकरी उठाने में असमर्थ रहता है, तो वृद्धा कहती है — जो एक टोकरी मिट्टी न उठा सके, वह इस झोंपड़ी का बोझ जन्मभर कैसे उठाएगा? यह सुनकर ज़मींदार को पश्चाताप होता है और वह झोंपड़ी वापस कर देता है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक: माधवराव सप्रे — हिंदी की प्रारंभिक कहानियों के महत्वपूर्ण रचयिता; मातृभाषा मराठी, जन्म दमोह (मध्य प्रदेश)।
  2. 02विधा: कहानी।
  3. 03केंद्रीय भाव: धन और अहंकार मनुष्य को उसके कर्तव्य से दूर कर देते हैं; नैतिक बोध और करुणा ही सच्ची शक्ति है।
  4. 04मुख्य पात्र: वृद्धा (बेदखल निर्धन महिला) और ज़मींदार (अहंकारी किंतु अंततः पश्चातापी)।
  5. 05केंद्रीय घटना: वृद्धा ने एक टोकरी मिट्टी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को यह बोध कराया कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं।
  6. 06शब्दार्थ — अहाता: किसी बड़े भवन के चारों ओर की घेरी हुई भूमि या परिसर।
  7. 07शब्दार्थ — धन-मद: धन के कारण उत्पन्न घमंड; मृतप्राय: मृत के समान, जीते-जी निश्चेष्ट।
Questions

Frequently asked questions

01

एक टोकरी भर मिट्टी का सारांश क्या है?

एक धनी ज़मींदार वकीलों की सहायता से अदालती कब्जा करके एक निर्धन वृद्धा की झोंपड़ी छीन लेता है। झोंपड़ी छूटने पर वृद्धा की पोती खाना छोड़ देती है। वृद्धा पोती के लिए चूल्हा बनाने हेतु एक टोकरी मिट्टी ले जाने की विनती करती है। जब ज़मींदार खुद टोकरी नहीं उठा पाता, तो वृद्धा कहती है — जो एक टोकरी न उठा सके, वह हज़ारों टोकरियों का बोझ जन्मभर कैसे उठाएगा? यह सुनकर ज़मींदार को पश्चाताप होता है और वह झोंपड़ी वापस कर देता है।

02

एक टोकरी भर मिट्टी के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे हैं। उनकी मातृभाषा मराठी थी और उनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था। यह कहानी हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में गिनी जाती है।

03

एक टोकरी भर मिट्टी का केंद्रीय भाव क्या है?

कहानी का केंद्रीय भाव यह है कि धन और अहंकार मनुष्य को उसके कर्तव्य और मानवीयता से दूर कर देते हैं। एक निर्बल वृद्धा बिना किसी हिंसा के केवल एक टोकरी मिट्टी के प्रतीक से ज़मींदार को अन्याय का बोध कराती है। अंततः पश्चाताप और करुणा ही सच्ची शक्ति साबित होती है।

04

Ek Tokri Bhar Mitti summary in Hindi

एक अमीर ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर अदालत के ज़रिये एक बूढ़ी गरीब महिला की झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया। झोंपड़ी छोड़ने पर वृद्धा की पोती ने खाना छोड़ दिया। वृद्धा ने पोती के लिए चूल्हा बनाने हेतु झोंपड़ी की मिट्टी माँगी। जब ज़मींदार टोकरी न उठा सका, तो वृद्धा बोली — जो एक टोकरी नहीं उठा सकता, वह हज़ारों टोकरियों का नैतिक भार कैसे उठाएगा? ज़मींदार को पश्चाताप हुआ और उसने झोंपड़ी वापस दे दी।

05

ज़मींदार ने वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?

ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर (थैली गरम करके) कानूनी दाँव-पेंच से अदालत के माध्यम से झोंपड़ी पर कब्जा किया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया। इससे पहले वह बहुत प्रयत्न कर चुका था कि वृद्धा स्वयं झोंपड़ी हटा ले, पर वह नहीं मानी।

06

वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया?

जब से झोंपड़ी छूटी थी, पोती खाना-पीना छोड़ चुकी थी। वह बार-बार कहती थी — 'अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी।' घर से उसका इतना गहरा लगाव था कि वह उसके बिना खाने को तैयार नहीं थी।

07

वृद्धा ने झोंपड़ी से एक टोकरी मिट्टी क्यों माँगी?

वृद्धा उस मिट्टी से पोती के लिए चूल्हा बनाना चाहती थी, ताकि अपने घर की मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती रोटी खाने लगे। उसे विश्वास था कि इससे पोती की ज़िद टूटेगी और वह खाना खाने लगेगी।

08

ज़मींदार टोकरी उठाने में सफल क्यों नहीं हुआ?

ज़मींदार ने किसी नौकर से न कहकर स्वयं टोकरी उठाने का प्रयास किया, परंतु अपनी सारी ताकत लगाने पर भी टोकरी वहाँ से एक हाथ भी ऊँची न हुई। वह लज्जित होकर बोले कि यह टोकरी उनसे न उठाई जाएगी। वृद्धा ने इसे प्रतीक बनाकर समझाया कि अन्याय का नैतिक भार उठाना भी इसी प्रकार असंभव है।

09

वृद्धा ने ज़मींदार से क्या कहा जब वह टोकरी नहीं उठा सका?

वृद्धा ने कहा — 'महाराज, नाराज न हों... आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी हैं। उसका भार आप जन्मभर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए।'

10

कहानी का अंत कैसा है?

कहानी का अंत सुखद और प्रेरणादायक है। वृद्धा के वचन सुनते ही ज़मींदार की आँखें खुल गईं। उन्होंने अपने किए कर्म का पश्चाताप किया, वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।

11

'अहाता' और 'धन-मद' शब्दों के अर्थ क्या हैं?

अहाता का अर्थ है — किसी बड़े भवन या महल के चारों ओर की घेरी हुई भूमि या परिसर। धन-मद का अर्थ है — धन की वजह से उत्पन्न घमंड या अभिमान।

12

माधवराव सप्रे कौन थे?

माधवराव सप्रे हिंदी के प्रारंभिक कहानीकारों में से एक थे। उनकी मातृभाषा मराठी थी और वे दमोह (मध्य प्रदेश) में जन्मे थे। उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के प्रसिद्ध ग्रंथ 'गीता-रहस्य' का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया था। स्वदेशी आंदोलन और बायकॉट उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।

13

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