Summary
'Aadmi ka Anupaat' Class 8 Hindi (Malhar) की कविता है जिसे गिरिजा कुमार माथुर ने लिखा है — यह कविता मानव के ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म होने के बावजूद उसकी ईर्ष्या, अहंकार और विभाजनकारी प्रवृत्ति को उजागर करती है।
कवि गिरिजा कुमार माथुर ने इस कविता में मानव के अनुपात को ब्रह्मांड की विशालता से तुलना की है। दो व्यक्ति एक कमरे में हैं जो स्वयं कमरे से भी छोटे हैं — कमरा घर में, घर मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में, नगर देश में, देश पृथ्वी पर, और पृथ्वी अनगिन नक्षत्रों में करोड़ों में एक नगण्य बिंदु मात्र है। लाखों ब्रह्मांडों में से एक ब्रह्मांड में यह पृथ्वी है, और हर ब्रह्मांड में न जाने कितनी पृथ्वियाँ, भूमियाँ और सृष्टियाँ हैं। इतने सूक्ष्म होने के बावजूद मानव ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में लीन रहकर असंख्य दीवारें खड़ी करता है और एक कमरे में भी दो अलग दुनिया रच लेता है।
Key points & formulas
- 01कवि: गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994), जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में; आकाशवाणी में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे
- 02विधा: कविता
- 03केंद्रीय भाव: मानव ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत लघु है, फिर भी वह ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ और घृणा में लिप्त रहकर दीवारें खड़ी करता है
- 04कविता में कमरे से ब्रह्मांड तक का क्रमिक विस्तार दिखाकर मानव की सीमाबद्धता और सृष्टि की अनंतता का बोध कराया गया है
- 05शब्दार्थ — संख्यातीत: जो गिनती की सीमा से परे हो, अनगिनत
- 06शब्दार्थ — नभ गंगा: आकाशगंगा (Milky Way)
- 07शब्दार्थ — विराट: अत्यंत विशाल, अपार
Frequently asked questions
01आदमी का अनुपात का सारांश क्या है?
इस कविता में कवि गिरिजा कुमार माथुर ने दिखाया है कि दो व्यक्ति एक कमरे में हैं, कमरा घर में, घर मोहल्ले में — इस तरह क्रमशः मानव पृथ्वी तक पहुँचता है। पृथ्वी अनगिन नक्षत्रों में करोड़ों में एक छोटी-सी है। इतने विशाल ब्रह्मांड में मानव एक अत्यंत सूक्ष्म अस्तित्व है, फिर भी वह ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा में लिप्त रहकर दीवारें खड़ी करता है और एक कमरे में भी दो दुनिया बना लेता है।
02आदमी का अनुपात के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में हुआ था। वे आकाशवाणी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे और उन्होंने कविताओं के अतिरिक्त नाटक, गीत, कहानी और निबंध भी लिखे।
03आदमी का अनुपात का केंद्रीय भाव क्या है?
कविता का केंद्रीय भाव यह है कि मानव ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म और नगण्य है, परंतु वह इस सच्चाई को भूलकर ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ और घृणा में डूबा रहता है, दूसरों पर प्रभुत्व जमाना चाहता है और एक छोटे-से कमरे में भी दो अलग दुनिया खड़ी कर लेता है।
04Aadmi ka Anupaat summary in hindi
कवि गिरिजा कुमार माथुर की इस कविता में मानव की लघुता और ब्रह्मांड की विशालता के अनुपात को दर्शाया गया है। कमरे से शुरू होकर ब्रह्मांड तक का विस्तार बताकर कवि ने समझाया है कि मानव इस विराट सृष्टि में एक बिंदुमात्र है, फिर भी वह अहंकार और विभाजन में लिप्त रहता है।
05आदमी का अनुपात में मानव की क्या कमियाँ बताई गई हैं?
कविता के अनुसार मानव ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में लीन रहता है। वह असंख्य दीवारें उठाता है, स्वयं को दूसरे का स्वामी बताता है और एक छोटे-से कमरे में भी दो अलग दुनिया रच लेता है।
06संख्यातीत शब्द का क्या अर्थ है?
संख्यातीत का अर्थ है — जो गिनती की सीमा से परे हो, अनगिनत। कविता में 'संख्यातीत शंख सी दीवारें' कहकर मानव द्वारा खड़ी की गई अनगिनत मानसिक और वास्तविक दीवारों की ओर संकेत किया गया है।
07नभ गंगा से कवि का क्या आशय है?
नभ गंगा का अर्थ आकाशगंगा (Milky Way) है। कविता में कहा गया है कि पृथ्वी 'परिधि नभ गंगा की' में समेटी गई है — अर्थात पृथ्वी आकाशगंगा की विशाल परिधि में एक छोटा-सा बिंदु मात्र है।
08'दो व्यक्ति कमरे में, कमरे से छोटे' पंक्ति का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति का अर्थ है कि दो व्यक्ति एक कमरे में रहते हैं लेकिन वे अपने अहंकार और संकीर्ण सोच के कारण कमरे से भी छोटे यानी अत्यंत सीमित हो जाते हैं। यह मानव की संकुचित मानसिकता पर तीखा व्यंग्य है।
09गिरिजा कुमार माथुर कौन थे?
गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में हुआ। उनके पिता देवीचरण माथुर भी कविताएँ लिखते थे। वे आकाशवाणी में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में मंजीर, नाश और निर्माण, धूप के धान शामिल हैं। उन्होंने प्रसिद्ध भावांतर गीत 'होंगे कामयाब' की भी रचना की।
10कविता में ब्रह्मांड की विशालता को कैसे दर्शाया गया है?
कवि ने कमरे से शुरू करके क्रमशः घर, मोहल्ला, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी, नक्षत्र, आकाशगंगा और लाखों ब्रह्मांडों तक का विस्तार दिखाया है। पृथ्वी को अनगिन नक्षत्रों में करोड़ों में एक छोटी-सी बताया गया है, और हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ, भूमियाँ और सृष्टियाँ हैं।
11विराट शब्द का अर्थ क्या है?
विराट का अर्थ है — अत्यंत विशाल, अपार। कविता में 'आदमी का विराट से' अनुपात दिखाया गया है, अर्थात मानव की तुलना इस विशाल ब्रह्मांड से की गई है।
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