स्वदेश
'Swadesh' Class 8 Hindi (Malhar) ki kavita hai jiske rachayita Gayaprasad Shukl 'Snehi' hain — यह एक देश-प्रेम का आह्वान गीत है जो बताता है कि जिस हृदय में स्वदेश का प्यार और साहस नहीं, वह हृदय नहीं पत्थर है।
- 1कवि: गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' (1883–1972), जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में; उन्होंने राष्ट्र-प्रेम के साथ-साथ किसान, मजदूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रभावकारी कविताएँ लिखीं
- 2विधा: कविता — देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करने वाली देशभक्ति कविता
- 3केंद्रीय भाव: जिस हृदय में स्वदेश के प्रति प्रेम, जोश और साहस नहीं वह हृदय नहीं पत्थर है; देश की उन्नति सब नागरिकों के अपने हाथों में है
- 4प्रमुख रचनाएँ: त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र, कृषक क्रंदन
- 5कठिन शब्दार्थ — परवाने: दीपक की लौ पर जलने वाले पतंगे; यहाँ देश के लिए बलिदान देने को तत्पर व्यक्ति

