Summary
Subhashitarasam Pitva Jivanam Saphalam Kuru is Chapter 3 of Class 8 Sanskrit Deepakam — a collection of eight Sanskrit subhashitas (wisdom shlokas) with word-by-word analysis and moral teaching. इस पाठ में आठ नीतिश्लोकों के अर्थ, अन्वय और भावार्थ सहित अध्ययन करके जीवन को सफल बनाने की प्रेरणा दी गई है।
इस पाठ में एक पितामही और उनकी पोती वत्से के संवाद द्वारा सुभाषितों का परिचय दिया गया है — 'सुष्ठु भाषितानि इति सुभाषितानि' अर्थात् शोभन वचन जो सदैव जनों के हित के लिए होते हैं। पाठ में आठ श्लोक हैं जो क्रमशः भारतभूमि की महिमा, गुण-पहचान, विनम्रता-परोपकार, मनुष्य की परख, आठ उत्तम गुण, सच्ची सभा, दुर्जन-संग से बचने और पुरुषार्थ के महत्त्व पर प्रकाश डालते हैं। ये श्लोक विष्णुपुराण, महाभारत, भर्तृहरि, हितोपदेश एवं चाणक्यनीति जैसे प्रसिद्ध ग्रन्थों से सम्बद्ध हैं।
Key points & formulas
- 01पाठ का विषय: आठ सुभाषित (नीतिश्लोक) जो आदर्श मानव-जीवन के निर्माण का मार्गदर्शन करते हैं; पितामही और पोती के संवाद द्वारा सुभाषितों का परिचय और उनके पठन का महत्त्व बताया गया है।
- 02केंद्रीय शिक्षा: सुभाषितों को पढ़कर उनका जीवन में प्रयोग करने से कर्तव्य-अकर्तव्य का स्पष्ट मार्गदर्शन मिलता है और जीवन सुखमय तथा सफल बनता है।
- 03प्रमुख पात्र: पितामही (दादी) — जो सुभाषितों का ज्ञान देती हैं; वत्से (पोती) — जिज्ञासु शिष्या जो प्रश्न पूछती है।
- 04महत्त्वपूर्ण श्लोक: 'गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः । पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः करी च सिंहस्य बलं न मूषकः ॥' — गुणवान् ही गुण पहचानता है, जैसे कोयल वसंत का गुण जानती है पर कौआ नहीं; हाथी सिंह का बल जानता है पर चूहा नहीं।
- 05आठ उत्तम गुण जो मनुष्य को प्रकाशित करते हैं: प्रज्ञा (विशेष बुद्धि), कौल्य (अच्छे कुल में जन्म), दम (इन्द्रियसंयम), श्रुत (शास्त्रज्ञान), पराक्रम (वीरता), अबहुभाषिता (कम और सार्थक बोलना), यथाशक्ति दान, और कृतज्ञता।
- 06कठिन शब्द — पिकः = कोकिलः (कोयल); वायसः = काकः (कौआ); अङ्गारः = दग्धकाष्ठ (अंगारा); करी = गजः (हाथी); दैवम् = भाग्यम् (भाग्य); अबहुभाषिता = मितभाषिता (कम और सार्थक बोलना)।
- 07व्याकरण टिप्पणी: पाठ में संधि और समास के उदाहरण दिए गए हैं — अनुद्धताः = न उद्धताः (नञ् तत्पुरुषसमासः); यथाशक्ति = शक्तिम् अनतिक्रम्य (अव्ययीभावः); अभ्युपैति = अभि + उप + एति (संधि)।
Frequently asked questions
01Subhashitarasam Pitva Jivanam Saphalam Kuru paath ka arth kya hai?
इस पाठ के शीर्षक का अर्थ है — 'सुभाषितों का रस पीकर जीवन को सफल करो।' सुभाषित का अर्थ है शोभन (सुंदर और हितकर) वचन, जिन्हें नीतिश्लोक भी कहते हैं।
02सुभाषित किसे कहते हैं?
पाठ में बताया गया है — 'सुष्ठु भाषितानि इति सुभाषितानि' अर्थात् जो वचन शोभन हों वे सुभाषित कहलाते हैं। ये सर्वदा जनों के हित के लिए होते हैं और कर्तव्य-अकर्तव्य का मार्गदर्शन करते हैं।
03इस पाठ में कितने श्लोक हैं और वे किन ग्रन्थों से सम्बद्ध हैं?
इस पाठ में आठ (8) सुभाषित श्लोक हैं। पाठ के योग्यताविस्तर खंड में विष्णुपुराण, महाभारत, भर्तृहरि (नीतिशतक, वैराग्यशतक), हितोपदेश और चाणक्यनीति जैसे प्रसिद्ध ग्रन्थों का उल्लेख किया गया है।
04'गुणी गुणं वेत्ति' श्लोक का क्या अर्थ है?
गुणवान् व्यक्ति ही दूसरों के गुणों को पहचान सकता है, गुणहीन नहीं। जैसे कोयल वसंत का गुण जानती है, कौआ नहीं; और हाथी सिंह का बल जानता है, चूहा नहीं। अर्थात् योग्य ही महत्त्व को समझ सकता है।
05'भवन्ति नम्राः तरवः फलोद्गमैः' का क्या भावार्थ है?
फलों से लदे वृक्ष नीचे झुक जाते हैं और जल से भरे बादल धरती पर आकर वर्षा करते हैं। उसी तरह सत्पुरुष समृद्धि में भी विनम्र रहते हैं। परोपकार करना उनका स्वाभाविक गुण है।
06सोने की परख से मनुष्य की परख की तुलना क्यों की गई है?
जैसे सोने को घिसने, काटने, तपाने और ठोकने — इन चार प्रकारों से परखा जाता है, उसी तरह मनुष्य को भी कुल, शील, गुण और कर्म — इन चार कसौटियों पर परखा जाता है।
07मनुष्य को प्रकाशित करने वाले आठ गुण कौन से हैं?
प्रज्ञा (विशेष बुद्धि), कौल्य (अच्छे कुल में जन्म), दम (इन्द्रियसंयम), श्रुत (शास्त्रज्ञान), पराक्रम (वीरता), अबहुभाषिता (कम और सार्थक बोलना), यथाशक्ति दान, और कृतज्ञता — ये आठ गुण मनुष्य को समाज में सम्मान दिलाते हैं।
08सच्ची सभा कौन सी होती है? पाठ में क्या कहा गया है?
पाठ के अनुसार वही सभा सच्ची है जहाँ वयोवृद्ध और ज्ञानवृद्ध जन हों और जो धर्म की बात करें। धर्म वही है जहाँ सत्य हो, और सत्य वह है जो छल से रहित हो।
09दुर्जन से मित्रता क्यों नहीं करनी चाहिए?
पाठ में बताया गया है कि दुर्जन अंगारे के समान है — गर्म अंगारा जलाता है और ठंडा अंगारा हाथ को काला करता है। उसी तरह दुर्जन दोनों अवस्थाओं में हानि ही करता है, इसलिए उसका संग नहीं करना चाहिए।
10'एकेन चक्रेण न रथस्य गतिः' — इसका जीवन में क्या संदेश है?
जैसे एक पहिये से रथ नहीं चल सकता, उसी तरह केवल भाग्य से काम नहीं बनता। पुरुषार्थ (प्रयत्न) और दैव (भाग्य) — दोनों मिलकर ही जीवन-रथ को सफलता तक पहुँचाते हैं।
11सुभाषित पढ़ने से क्या लाभ होता है?
पाठ में कहा गया है कि सुभाषित पढ़ने से आदर्श मानव-जीवन के निर्माण की प्रेरणा मिलती है। ये कर्तव्य और अकर्तव्य का स्पष्ट मार्गदर्शन करते हैं और जीवन के रहस्य को समझने में सहायता करते हैं।
12भारतभूमि की महिमा के विषय में इस पाठ में क्या कहा गया है?
पाठ के पहले श्लोक में विष्णुपुराण के आधार पर कहा गया है कि जो मानव भारतभूमि में जन्म लेते हैं वे धन्य हैं। यह भूखण्ड स्वर्ग और मोक्ष का मार्ग है और देवता भी यहाँ मनुष्यरूप में जन्म लेने की इच्छा रखते हैं।
13class 8 Sanskrit deepakam chapter 3 mein kaun se katha patra hain?
इस पाठ में दो पात्र हैं — पितामही (दादी) जो सुभाषितों का ज्ञान देती हैं, और वत्से (पोती) जो नई कथा सुनने की जगह नीतिश्लोक सुनने को तैयार हो जाती है।
14क्या यह अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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