Class 9 Hindi

Chapter 12 — Ghar Ki Yaad

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Overview

Summary

'Ghar Ki Yaad' Class 9 Hindi (Ganga) ki kavita hai — भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान जेल में लिखी, जिसमें सावन की घनघोर वर्षा के बीच परिवार की तीव्र स्मृति और सावन के बादल को दूत बनाकर सांत्वना देने की भावना व्यक्त हुई है।

सन् 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने के कारण तीन वर्ष के कारावास का दंड भोग रहे कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने सावन की घनघोर वर्षा के बीच अपने परिवार को याद किया। कविता में चार भाई, चार बहनें, ममतामयी अनपढ़ माँ और 'वज्र-भुज नवनीत-सा उर' वाले भोले-बहादुर पिता की स्मृतियाँ एक-एक कर उभरती हैं। कवि स्वयं को परिवार का 'पाँचवाँ' सदस्य बताते हैं। वे सावन के बादल से आग्रह करते हैं कि परिवार को सांत्वना दे, किन्तु उनके कष्टों से अवगत न कराए — यही इस कविता की केंद्रीय संवेदना है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01विधा: कविता (गीतात्मक)
  2. 02कवि: भवानीप्रसाद मिश्र — जन्म 1913, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश); निधन 1985; 'बुनी हुई रस्सी' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त
  3. 03रचना-पृष्ठभूमि: 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान ब्रिटिश कारावास में लिखी गई
  4. 04केंद्रीय भाव: कारावास में परिवार की गहरी स्मृति, राष्ट्रभक्ति और परिजनों को कष्ट न देने की भावना
  5. 05प्रमुख काव्य-बिंब: सावन की वर्षा — कवि के भीतरी दुःख का प्रतीक; सावन का बादल — संदेशवाहक (दूत) के रूप में
  6. 06ध्वनि-सौंदर्य: 'झरा-झर, हरा-हर, सर-सर, थर-थर' — शब्दों की ध्वनि की आवृत्ति से वातावरण का निर्माण
  7. 07कठिन शब्दार्थ: वज्र = बहुत कठोर; नवनीत = ताजा मक्खन; परिताप = अत्यधिक दुःख; घनेरा = घना; तृषा = तीव्र इच्छा/प्यास; धीर = स्थिर चित्त वाला
Questions

Frequently asked questions

01

Ghar Ki Yaad का सारांश क्या है?

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर जेल गए कवि भवानीप्रसाद मिश्र सावन की वर्षा में अपने परिवार — माँ, पिता, चार भाई, चार बहनों — को याद करते हैं। वे सावन के बादल से आग्रह करते हैं कि परिवार को यह न बताए कि वे कष्ट में हैं, बल्कि उन्हें सांत्वना दे। परिवार के प्रति प्रेम और राष्ट्रभक्ति का समन्वय ही इस कविता का सार है।

02

Ghar Ki Yaad के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि भवानीप्रसाद मिश्र हैं। उनका जन्म 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में हुआ था और निधन 1985 में। वे स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय रहे और 'बुनी हुई रस्सी' कविता संग्रह पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए।

03

Ghar Ki Yaad का केंद्रीय भाव क्या है?

परिवार की स्मृति इस कविता की केंद्रीय संवेदना है। कारावास में रहते हुए कवि सावन की वर्षा देखकर घर को याद करते हैं और सावन के बादल को दूत बनाकर परिजनों तक संदेश भेजते हैं। वे चाहते हैं कि परिवार को उनके कष्टों की जानकारी न हो और वे चिंता न करें।

04

यह कविता किस परिस्थिति में लिखी गई थी?

भवानीप्रसाद मिश्र ने सन् 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तीन वर्ष के कारावास का दंड दिया। जेल में रहते हुए ही उन्होंने 'घर की याद' कविता लिखी।

05

कविता में सावन के बादल का क्या महत्व है?

सावन का बादल इस कविता में दूत (संदेशवाहक) की भूमिका निभाता है। कवि बादल से आग्रह करते हैं कि वह उनके परिवार तक सांत्वना का संदेश पहुँचाए, किन्तु उनके कष्टों की जानकारी न दे। साथ ही लगातार गिरती वर्षा कवि के मन की बेचैनी और उदासी का प्रतीक भी है।

06

'वज्र-भुज नवनीत-सा उर' का क्या अर्थ है?

यह पंक्ति पिताजी के व्यक्तित्व की दो विपरीत विशेषताओं को एक साथ प्रस्तुत करती है — 'वज्र-भुज' अर्थात् वज्र के समान कठोर भुजाएँ (शक्तिशाली शरीर) और 'नवनीत-सा उर' अर्थात् ताजे मक्खन जैसा कोमल हृदय। यानी पिता बाहर से कठोर और भीतर से अत्यंत भावुक हैं।

07

कविता में माँ की क्या छवि है?

माँ की छवि स्नेहमयी और भावनात्मक रूप से मजबूत है। वे अनपढ़ हैं (उन्हें लिखना नहीं आता), पर उनकी ममता असीम है — कवि लिखते हैं कि माँ की गोद में सिर रखने पर दुःख नहीं रहता। माँ परिवार को ढाढ़स बँधाती हुई कहती हैं कि कवि जो कर रहे हैं वह सही है, वह उनकी 'लीक' है।

08

कविता में 'पाँचवाँ' से क्या आशय है?

कवि अपने परिवार में चार भाइयों का उल्लेख करते हैं और स्वयं को 'पाँचवाँ' कहते हैं। वे कहते हैं — 'पाँचवाँ मैं हूँ अभागा' — अर्थात् वे परिवार के पाँचवें पुत्र हैं जो जेल में बंद हैं, इसीलिए 'अभागा' कहते हैं। पिता उनका नाम लेकर रो पड़ते हैं।

09

कवि ने परिवार से क्या छिपाने का आग्रह किया?

कवि ने सावन के बादल और हवा से आग्रह किया कि परिवार को यह न बताएँ कि वे जागते रहते हैं, उदास हैं, लोगों से भागते हैं या मौन रहते हैं। बल्कि उन्हें यह कहें कि वे 'मस्त हैं', लिख-पढ़ रहे हैं, काम कर रहे हैं और स्वस्थ हैं — ताकि परिवार को चिंता न हो।

10

कविता में कौन-से ध्वन्यात्मक शब्द हैं और उनका क्या प्रभाव है?

'झरा-झर, हरा-हर, सर-सर, थर-थर' जैसे शब्दों के प्रयोग से कविता में ध्वन्यात्मकता और नाद-सौंदर्य उत्पन्न होता है। इन शब्दों को पढ़ते समय वर्षा, पत्तों की हलचल, हवा और मन की कँपकँपी का जीवंत अनुभव होता है।

11

'परिताप' शब्द का अर्थ क्या है?

परिताप का अर्थ है — अत्यधिक दुःख, शोक या पीड़ा। कविता में 'बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर' पंक्ति में यह शब्द घर में व्याप्त दुःख के वातावरण की ओर संकेत करता है।

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Ghar Ki Yaad summary in Hindi

Jail mein band kavi Bhavaniprasad Mishra sawan ki baarish mein apne ghar ko yaad karte hain — maa, pitaji, char bhai, char bahinon ko. Ve saavan ke baadal ko sandeshvaahak banakar parivaar ko santvana dene ka aagrah karte hain, kintu apna dukh chhupana chahte hain. Kavita mein desh-bhakti aur parivaar-prem ka sundar samanvay hai.

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Ghar Ki Yaad ke kavi kaun hain?

Ghar Ki Yaad ke kavi Bhavaniprasad Mishra hain. Unka janm 1913 mein Hoshangabad, Madhya Pradesh mein hua tha. Unhone 1942 ke Bharat Chhodo Andolan mein hissa liya aur jail mein yah kavita likhi. 'Buni Hui Rassi' par inhe Sahitya Akademi Puraskar mila.

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