Summary
'Yah Janati Sah Panditah' Class 6 Sanskrit (Deepakam) ka gyaarhaavaan paath hai — इसमें पाँच संस्कृत प्रहेलिकाएँ (पहेलियाँ), षष्ठी विभक्ति का व्याकरण, प्रसिद्ध गुरु-शिष्य युगल, महान संस्कृत ग्रन्थों के रचयिता और दो सुभाषित श्लोक सिखाए गए हैं।
यह पाठ संस्कृत की पाँच मनोरंजक प्रहेलिकाओं से आरम्भ होता है जो बुद्धि एवं तार्किक शक्ति को बढ़ाती हैं। प्रहेलिकाओं के उत्तर हैं — तक्रम्, नयनम्, अनानसः, मृत्युम्/जयः, और कुम्भकर्णः। इसके साथ षष्ठी विभक्ति (सम्बन्ध कारक) का विस्तृत अभ्यास कराया गया है। पाठ में वसिष्ठ-राम, चाणक्य-चन्द्रगुप्त जैसे प्रसिद्ध गुरु-शिष्य युगल एवं रामायण, महाभारत, पञ्चतन्त्र जैसे ग्रन्थों के रचयिताओं का परिचय दिया गया है। अन्त में 'अलसस्य कुतो विद्या' और 'हस्तस्य भूषणं दानम्' जैसे प्रेरणादायक श्लोक तथा एक लघुकथा भी है।
Key points & formulas
- 01पाँच संस्कृत प्रहेलिकाएँ और उनके उत्तर: तक्रम् (छाछ), नयनम् (आँख), अनानसः (अनानास), मृत्युम्/जयः, कुम्भकर्णः
- 02षष्ठी विभक्ति: जहाँ सम्बन्ध हो वहाँ षष्ठी विभक्ति आती है — 'बालकस्य पुस्तकम्'; पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग तीनों में रूप सिखाए गए
- 03प्रसिद्ध गुरु-शिष्य युगल: वसिष्ठ-श्रीराम, परशुराम-कर्ण, द्रोण-अर्जुन, चाणक्य-चन्द्रगुप्त, शङ्कराचार्य-पद्मपाद, रामकृष्ण-विवेकानन्द
- 04महान संस्कृत ग्रन्थ और रचयिता: रामायण-वाल्मीकि, महाभारत-व्यास, रघुवंश-कालिदास, पञ्चतन्त्र-विष्णुशर्मा, हितोपदेश-नारायणपण्डित
- 05प्रमुख शब्दार्थ: तक्रम् = छाछ, पेयम् = पीने के योग्य, कुलालस्य = कुम्हार का, रणे = युद्ध में, सुतः = पुत्र
- 06श्लोक: 'अलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम्' — परिश्रम ही विद्या, धन, मित्र और सुख का आधार है
- 07लघुकथा: 'गोपनागोपन' (छुपाछुपी) खेल — नाजिया, मोहित, बबली, उमा, मीता और अजित पात्र
Frequently asked questions
01Yah Janati Sah Panditah paath mein kya sikhaya gaya hai?
इस पाठ में पाँच संस्कृत प्रहेलिकाएँ (पहेलियाँ), षष्ठी विभक्ति का व्याकरण, प्रसिद्ध गुरु-शिष्य युगल, संस्कृत ग्रन्थों के रचयिता, दो सुभाषित श्लोक और एक लघुकथा ('गोपनागोपन') सिखाई गई है।
02Yah Janati Sah Panditah ka arth kya hai?
'यः जानाति सः पण्डितः' का अर्थ है — जो जानता है, वही पण्डित (विद्वान) होता है। यह पाठ का शीर्षक है जो ज्ञान के महत्त्व पर बल देता है।
03प्रहेलिका क्या होती है? इस पाठ में कितनी प्रहेलिकाएँ हैं?
पाठ के अनुसार 'हेला' का अर्थ क्रीडा (खेल) है और प्रहेलिका वह होती है जो अभिप्राय को सूचित करे। इस पाठ में पाँच संस्कृत प्रहेलिकाएँ हैं जो बुद्धि की तार्किक शक्ति और कल्पनाशक्ति को बढ़ाती हैं।
04पहली प्रहेलिका 'भोजनान्ते च किं पेयम्' का उत्तर क्या है?
पहली प्रहेलिका के उत्तर हैं: भोजन के अन्त में पीने योग्य है — तक्रम् (छाछ); जयन्त शक्र (इन्द्र) के पुत्र हैं; और विष्णुपद को 'दुर्लभम्' कहा गया है।
05दूसरी प्रहेलिका 'न तस्यादिर्न तस्यान्तो' का उत्तर क्या है?
उत्तर है — नयनम् (आँख)। 'नयन' शब्द के आदि और अन्त में 'न' है तथा मध्य में 'य' है। यह हर व्यक्ति में पाया जाता है।
06तीसरी प्रहेलिका 'वृक्षस्याग्रे फलं दृष्टम्' का उत्तर क्या है?
उत्तर है — अनानसः (अनानास)। यह 'अ' से शुरू और 'स' पर समाप्त होता है — पाठ की पंक्ति है: 'अकारादिं सकारान्तं यो जानाति स पण्डितः'।
07पाँचवीं प्रहेलिका 'कुलालस्य गृहे ह्यर्धम्' का उत्तर क्या है?
उत्तर है — कुम्भकर्णः। कुम्भकार (कुलाल) के घर पर अर्धांश 'कुम्भः' है, हस्तिनापुर में 'कर्णः' है, और दोनों मिलकर लंका में 'कुम्भकर्णः' बनते हैं।
08षष्ठी विभक्ति का प्रयोग कब होता है?
पाठ के अनुसार जहाँ दो वस्तुओं या व्यक्तियों के बीच सम्बन्ध दर्शाना हो, वहाँ षष्ठी विभक्ति आती है। उदाहरण — 'बालकस्य पुस्तकम्' (बालक की पुस्तक)। पुंलिङ्ग में 'स्य', स्त्रीलिङ्ग में 'याः', नपुंसकलिङ्ग में 'स्य' प्रत्यय आते हैं।
09इस पाठ में कौन-कौन से गुरु-शिष्य युगल बताए गए हैं?
पाठ में छः प्रसिद्ध गुरु-शिष्य युगल हैं: वसिष्ठ-श्रीराम, परशुराम-कर्ण, द्रोण-अर्जुन, चाणक्य-चन्द्रगुप्त, शङ्कराचार्य-पद्मपाद, और रामकृष्ण-विवेकानन्द।
10पाठ में किन संस्कृत ग्रन्थों और उनके रचयिताओं का उल्लेख है?
पाठ में ये ग्रन्थ और रचयिता बताए गए हैं: रामायण — वाल्मीकि; महाभारत — व्यास; कर्णभार — भास; रघुवंश — कालिदास; पञ्चतन्त्र — विष्णुशर्मा; हितोपदेश — नारायणपण्डित।
11'अलसस्य कुतो विद्या' श्लोक का अर्थ क्या है?
इस श्लोक का अर्थ है: आलसी को विद्या कहाँ? जिसे विद्या नहीं उसे धन कहाँ? जिसके पास धन नहीं उसे मित्र कहाँ? और बिना मित्र के सुख कहाँ? अर्थात् परिश्रम ही सब कुछ प्राप्त कराता है।
12'हस्तस्य भूषणं दानम्' श्लोक का क्या अर्थ है?
इस श्लोक का अर्थ है: हाथ का सच्चा आभूषण दान है, कण्ठ का सत्य है, और कान (श्रोत्र) का शास्त्र (ज्ञान) है। जब ये गुण हों तो भौतिक आभूषणों (गहनों) की क्या आवश्यकता?
13क्या Yah Janati Sah Panditah अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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