Class 6 Sanskrit

Chapter 8 — Sah Eva Mahan Chitrakaarah

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Overview

Summary

'Sah Eva Mahan Chitrakaarah' Class 6 Sanskrit (Deepakam) ka paath hai — यह एक संवाद-कथा है जो बताती है कि प्रकृति के समस्त रंगों का रचयिता परमेश्वर ही सबसे महान् चित्रकार है।

इस पाठ में एक आचार्य अपने छात्रों को विद्यापीठ के समीप 'अमृत-उद्यान' में ले जाते हैं। वहाँ छात्र पत्तों, पुष्पों, पक्षियों और जन्तुओं के विभिन्न वर्णों का अवलोकन करते हैं — हरे पत्ते, लाल जपापुष्प, चित्रवर्ण शुक (तोता), काले काक-पिक, श्वेत हंस-बक, और इन्द्रधनुष के सात रंग। अंत में आचार्य पूछते हैं कि इन सब रंगों का चित्रकार कौन है? सभी छात्र एकस्वर उत्तर देते हैं — 'परमेश्वरः!' और आचार्य कहते हैं — 'सः एव महान् चित्रकारः।'

Essentials

Key points & formulas

  1. 01पाठ एक संवाद-कथा है जो विद्यापीठ के समीप 'अमृत-उद्यान' में घटित होती है; यह उद्यान पाँच हजार से अधिक नित्य और ऋतु-पुष्पों से सुशोभित है।
  2. 02छात्र प्रकृति के विभिन्न वर्णों का अवलोकन करते हैं — हरित (हरा), रक्त (लाल), कृष्ण (काला), श्वेत (सफ़ेद), पीत (पीला), नील (नीला), पाटल (गुलाबी), नीललोहित (जामुनी), केसर (केसरिया)।
  3. 03प्रमुख पात्र: आचार्य (शिक्षक), श्रद्धा, मेधा, मनीषा, आशित, मञ्जुल, आदित्य।
  4. 04पाठ का केंद्रीय संदेश (moral): सर्व निसर्ग (प्रकृति) बहुवर्णमयः है; इन सब वर्णों का योजक परमेश्वर ही सबसे महान् चित्रकार है।
  5. 05प्रमुख कठिन शब्द: निसर्गः = प्रकृति; जपापुष्पम् = गुड़हल; चञ्चुः = चोंच; पाटलपुष्पम् = गुलाब; इन्द्रधनुः = इंद्रधनुष; प्रावारकम् = कोट।
  6. 06पाठ में राष्ट्रीय ध्वज के वर्णों (केसर, श्वेत, हरित, नील) पर आधारित अभ्यास सम्मिलित है।
  7. 07पाठ के अंत में अमरकोश से श्वेत, कृष्ण, पीत, रक्त और भूरे रंगों के अनेक संस्कृत पर्यायवाची शब्द (जैसे श्वेत के — शुक्लः, शुभ्रः, धवलः, गौरः आदि) दिए गए हैं।
Questions

Frequently asked questions

01

Sah Eva Mahan Chitrakaarah paath mein kya sikhaya gaya hai?

इस पाठ में प्रकृति के विविध रंगों (वर्णों) का परिचय दिया गया है और यह सिखाया गया है कि इन सब रंगों का रचयिता परमेश्वर ही सबसे महान् चित्रकार है।

02

Sah Eva Mahan Chitrakaarah ka arth kya hai?

'सः एव महान् चित्रकारः' का अर्थ है — 'वही एकमात्र महान् चित्रकार है।' पाठ में परमेश्वर को यह उपाधि दी गई है क्योंकि वही प्रकृति के समस्त रंगों की रचना करते हैं।

03

पाठ में महान् चित्रकार कौन है?

इस पाठ में परमेश्वर को महान् चित्रकार बताया गया है। जब आचार्य छात्रों से पूछते हैं — 'वर्णयोजकः चित्रकारः कः?' — तो सभी छात्र एकस्वर उत्तर देते हैं — 'परमेश्वरः!' और आचार्य कहते हैं — 'आम्। सः एव महान् चित्रकारः।'

04

जपापुष्पम् का अर्थ क्या है?

जपापुष्पम् का अर्थ है गुड़हल का फूल। पाठ में बताया गया है कि जपापुष्प का वर्ण रक्त (लाल) होता है।

05

शुकः का अर्थ क्या है और उसका वर्ण क्या है?

शुकः का अर्थ है तोता। पाठ में बताया गया है कि शुक (तोते) चित्रवर्ण (रंगीन/हरे) होते हैं और उनकी चञ्चुः (चोंच) रक्त (लाल) वर्ण की होती है।

06

पाठ में किन-किन पक्षियों के वर्णों का वर्णन है?

पाठ में इन पक्षियों के वर्ण बताए गए हैं — शुकः (तोता, चित्रवर्ण), काकः (कौआ, कृष्ण), पिकः (कोयल, कृष्ण), हंसः (हंस, श्वेत), बकः (बगुला, श्वेत)।

07

पाटलपुष्पम् (गुलाब) किन-किन वर्णों में होता है?

पाठ में मञ्जुल बताता है कि पाटलपुष्प (गुलाब) पीत (पीला), श्वेत (सफ़ेद), नीललोहित (जामुनी) और केसर (केसरिया) — इन विभिन्न वर्णों में होते हैं।

08

इन्द्रधनुष में कितने रंग होते हैं, पाठ के अनुसार?

पाठ में मञ्जुल कहता है कि इन्द्रधनुः (इंद्रधनुष) बहुवर्णमयः है और उसमें सप्त (सात) वर्ण होते हैं।

09

श्रद्धा का इष्टवर्णः (पसंदीदा रंग) क्या है?

पाठ में आचार्य कहते हैं कि श्रद्धा का इष्टवर्णः (पसंदीदा रंग) हरित (हरा) है, क्योंकि वह हरे पत्तों की ओर सबसे पहले ध्यान देती है।

10

निसर्गः और चञ्चुः का हिन्दी अर्थ क्या है?

निसर्गः का हिन्दी अर्थ है प्रकृति। चञ्चुः का अर्थ है चोंच। पाठ में कहा गया है कि निसर्गः बहुवर्णमयः है — इसीलिए संसार सुन्दर लगता है।

11

पाठ में राष्ट्रीय ध्वज के वर्ण कौन-कौन से हैं?

पाठ के अभ्यास में राष्ट्रीय ध्वज के वर्ण पूछे गए हैं — ऊपर केसर वर्ण (भगवा), मध्य में श्वेत वर्ण (सफ़ेद), नीचे हरित वर्ण (हरा), और ध्वज के केन्द्र में नील वर्ण (नीला — अशोक चक्र)।

12

पाठ में अमरकोश से क्या सिखाया गया है?

पाठ के अंत में अमरकोश से विभिन्न वर्णों के संस्कृत पर्यायवाची शब्द दिए गए हैं — जैसे श्वेत के पर्याय: शुक्लः, शुभ्रः, धवलः, गौरः, पाण्डरः आदि; और कृष्ण के पर्याय: श्यामः, कालः, मेचकः, नीलः आदि।

13

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