Class 6 Sanskrit

Chapter 6 — Aham Pratah Uttishthami

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Overview

Summary

'Aham Pratah Uttishthami' Class 6 Sanskrit (Deepakam) ka paath hai — इस पाठ में संदीप और खुशी अपनी प्रातःकालीन दिनचर्या संस्कृत में बताते हैं और साथ में संस्कृत संख्याएँ (१-१२), घड़ी का समय (सपाद/सार्ध/पादोन) तथा शिष्टाचार के शब्द सिखाए जाते हैं।

इस पाठ में दो बच्चे — संदीप और खुशी — अपनी-अपनी सुबह की दिनचर्या संस्कृत में बताते हैं। प्रातः पाँच बजे उठने से लेकर आठ बजे विद्यालय जाने तक के सभी कार्य — भूमि-वंदना, उषःपान, योगासन, स्वाध्याय, स्नान, प्रार्थना, गीतापाठ और प्रातराश — सरल संस्कृत वाक्यों में बताए गए हैं। पाठ में संस्कृत संख्याएँ (एकम् से द्वादश), संस्कृत में समय बताने की विधि और प्रातःस्मरण के दो श्लोक भी सिखाए गए हैं।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01पाठ में सुबह ५ बजे से ८ बजे तक की दिनचर्या संस्कृत में बताई गई है — उठना, भूमि-वंदना, उषःपान, योगासन, स्वाध्याय, स्नान, प्रार्थना, प्रातराश और विद्यालय जाना।
  2. 02संस्कृत संख्याएँ सिखाई गई हैं: एकम् (१), द्वे (२), त्रीणि (३), चत्वारि (४), पञ्च (५), षट् (६), सप्त (७), अष्ट (८), नव (९), दश (१०), एकादश (११), द्वादश (१२)।
  3. 03संस्कृत में समय बताने के विशेष शब्द सिखाए गए हैं — 'सपाद' (१५ मिनट अधिक), 'सार्ध' (३० मिनट अधिक), 'पादोन' (१५ मिनट कम)।
  4. 04प्रमुख शब्दार्थ: उत्तिष्ठामि = जागता/जागती हूँ; उषःपानम् = सुबह गुनगुना जल पीना; दन्तधावनम् = दाँतों का मंजन; स्वाध्यायम् = स्वयं अध्ययन; प्रातराशम् = नाश्ता (अल्पाहार)।
  5. 05पाठ के अभ्यास में शिष्टाचार के शब्द हैं — गुरुवन्दनम्, वृद्धसेवा, प्राणिषु दया, परोपकारः, सत्यकथनम्, स्वच्छता, समयपालनम्, अतिथिसत्कारः।
  6. 06भूमिवन्दना के दो श्लोक सिखाए गए हैं — 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥' और 'समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥'
  7. 07योग्यताविस्तर में प्राचीन भारतीय समय-मापन परम्परा बताई गई है — कोणार्क सूर्यमंदिर (ओडिशा), जयपुर का घटिकायंत्र और दिल्ली का मिश्रयंत्र (जंतर-मंतर)।
Questions

Frequently asked questions

01

Aham Pratah Uttishthami paath mein kya sikhaya gaya hai?

इस पाठ में सुबह की दिनचर्या संस्कृत में बताना सिखाया गया है। साथ ही संस्कृत में संख्याएँ (१-१२), घड़ी का समय (सपाद/सार्ध/पादोन के साथ) और शिष्टाचार के शब्द भी सिखाए गए हैं।

02

Aham Pratah Uttishthami ka arth kya hai?

'अहम्' = मैं, 'प्रातः' = सुबह, 'उत्तिष्ठामि' = उठता/उठती हूँ। पूरे वाक्य का अर्थ है — 'मैं सुबह उठता/उठती हूँ।' यह पाठ का मुख्य वाक्य और शीर्षक है।

03

पाठ में संदीप और खुशी की दिनचर्या क्या है?

वे प्रातः ५ बजे उठते हैं, भूमि-वंदना और माता-पिता को नमन करते हैं, उषःपान (गुनगुना जल) करते हैं, ५ः१५ पर शौच-मुखप्रक्षालन-दन्तधावन करते हैं, ५ः३० पर सूर्य-नमस्कार और योगासन करते हैं, ६ बजे स्वाध्याय, ६ः३० पर परिसर स्वच्छ करना, ६ः४५ पर स्नान, ७ बजे प्रार्थना और गीतापाठ, माता-पिता के चरण स्पर्श, ७ः३० पर प्रातराश और ८ बजे विद्यालय जाते हैं।

04

संस्कृत में 'सपाद', 'सार्ध' और 'पादोन' का क्या अर्थ है?

'सपाद' का अर्थ है एक-चौथाई (१५ मिनट) अधिक — जैसे सपाद-पञ्चवादनम् = ५ः१५। 'सार्ध' का अर्थ है आधा (३० मिनट) अधिक — जैसे सार्ध-पञ्चवादनम् = ५ः३०। 'पादोन' का अर्थ है एक-चौथाई (१५ मिनट) कम — जैसे पादोन-सप्तवादनम् = ६ः४५।

05

संस्कृत में संख्याएँ १ से १२ कैसे बोलते हैं?

एकम् (१), द्वे (२), त्रीणि (३), चत्वारि (४), पञ्च (५), षट् (६), सप्त (७), अष्ट (८), नव (९), दश (१०), एकादश (११), द्वादश (१२)।

06

'उषःपानम्' का अर्थ और महत्त्व क्या है?

'उषःपानम्' का अर्थ है — प्रातःकाल कवोष्ण (गुनगुना) जल पीना। पाठ में बताया गया है कि संदीप प्रातः ५ बजे उठने के बाद भूमि-वंदना करके उषःपान करता है।

07

पाठ में भूमिवन्दना के कौन-से श्लोक हैं?

पाठ में दो श्लोक दिए गए हैं। पहला प्रातःस्मरण: 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥' दूसरा भूमिवन्दना: 'समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥'

08

इस पाठ में कौन-से शिष्टाचार के शब्द सिखाए गए हैं?

पाठ के अभ्यास में अनेक शिष्टाचार-शब्द हैं — गुरुवन्दनम् (गुरु का सम्मान), वृद्धसेवा (बड़ों की सेवा), प्राणिषु दया (जीवों पर दया), परोपकारः (दूसरों की मदद), सत्यकथनम् (सच बोलना), स्वच्छता (सफाई), समयपालनम् (समय की पाबंदी), अतिथिसत्कारः (मेहमान का स्वागत)।

09

पाठ के योग्यताविस्तर में क्या बताया गया है?

योग्यताविस्तर में भारतीय ज्ञान-परम्परा में समय-मापन की विधि बताई गई है। ओडिशा के कोणार्क सूर्यमंदिर के चक्र, जयपुर के जंतर-मंतर का घटिकायंत्र और दिल्ली के जंतर-मंतर का मिश्रयंत्र — ये प्राचीन भारतीय समय-मापन यंत्रों के उदाहरण दिए गए हैं।

10

'दिनचर्याम् वदामि' का अर्थ क्या है?

'दिनचर्याम्' = दैनिक कार्यों की सूची, 'वदामि' = बोल रहा/रही हूँ। पाठ की शुरुआत में संदीप और खुशी कहते हैं — 'अहं मम दिनचर्यां वदामि' — अर्थात् मैं अपनी दिनचर्या बताता/बताती हूँ।

11

'प्रातराशम्' और 'स्वाध्यायम्' का अर्थ क्या है?

'प्रातराशम्' का अर्थ है — सुबह का नाश्ता (अल्पाहार/Breakfast)। 'स्वाध्यायम्' का अर्थ है — स्वयं अध्ययन करना (Self-study)। पाठ में बताया गया है कि संदीप ६ बजे स्वाध्याय और ७ः३० बजे प्रातराश करता है।

12

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