Summary
'Giridhar Kaviray Ki Kundaliya' Class 7 Hindi (Malhar) ki do neetiparaK kundaliyaan hain — इसमें गिरधर कविराय बिना सोचे-समझे काम न करने और बीती बातों को भूलकर आगे बढ़ने का सरल व सीधा संदेश देते हैं।
इस पाठ में गिरधर कविराय की दो कुंडलियाँ हैं। पहली कुंडलिया में कवि कहते हैं कि बिना सोचे-समझे काम करने वाला व्यक्ति बाद में पछताता है — उसका काम बिगड़ता है, दुनिया हँसती है और मन को चैन नहीं मिलता; खान-पान, सम्मान, राग-रंग कुछ भी अच्छा नहीं लगता। दूसरी कुंडलिया में संदेश है — बीती बातों को भूलकर आगे की सोचो, जो काम सहजता से हो सके वही करो, ताकि न कोई बुरा इंसान हँसे और न मन में कोई ग्लानि रहे।
Key points & formulas
- 01कवि: गिरधर कविराय (अठारहवीं सदी के प्रसिद्ध नीतिकाव्य-रचयिता)
- 02विधा: कुंडलियाँ (नीतिपरक काव्य — दो-दो पंक्तियों में बात कही गई है)
- 03केंद्रीय भाव: बिना विचार किए काम मत करो; अतीत की गलतियों को भूलकर भविष्य पर ध्यान दो
- 04कुंडलिया की विशेषता: हर कुंडलिया का पहला या दूसरा शब्द उसका अंतिम शब्द भी होता है, और पंक्तियाँ पढ़ते समय बातचीत जैसा अनुभव होता है
- 05कठिन शब्दार्थ: पिछताय = पछताना; बिसारि = भूल जाना; परतीती = विश्वास
- 06कठिन शब्दार्थ: खटकत = मन में चुभना / बना रहना; सुधि = याद / स्मृति; दुर्जन = बुरा व्यक्ति
- 07गिरधर कविराय की रचनाएँ लोक में कहावतों की तरह इतनी प्रसिद्ध हैं कि लोग इन्हें आज भी उसी रूप में उपयोग करते हैं
Frequently asked questions
01Giridhar Kaviray Ki Kundaliya का सारांश क्या है?
इस पाठ में गिरधर कविराय की दो कुंडलियाँ हैं। पहली कुंडलिया बताती है कि बिना सोचे-समझे काम करने पर पछतावा होता है, काम बिगड़ता है और मन को चैन नहीं मिलता। दूसरी कुंडलिया कहती है कि बीती बातों को भूलकर आगे की सोचो और जो काम सहजता से हो सके वही करो, ताकि मन में ग्लानि न रहे।
02Giridhar Kaviray Ki Kundaliya के कवि कौन हैं?
इन कुंडलियों के कवि गिरधर कविराय हैं। वे अठारहवीं सदी में जन्मे थे और अपनी लोकप्रचलित नीतिपरक कुंडलियों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाएँ सरल और सीधी भाषा में लोकनीति की बातें कहती हैं।
03Giridhar Kaviray Ki Kundaliya का केंद्रीय भाव क्या है?
पाठ का केंद्रीय भाव दो भागों में है — (1) बिना सोचे-समझे काम नहीं करना चाहिए, वरना पछताना पड़ता है और मन को चैन नहीं मिलता। (2) बीती बातों को भूलकर आगे की सोचनी चाहिए और जो काम सहज हो वही करना चाहिए।
04'बिना बिचारे जो करै सो पाछे पिछताय' का अर्थ क्या है?
इस पंक्ति का अर्थ है — जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे काम करता है, वह बाद में पछताता है। ऐसे काम से अपना काम बिगड़ जाता है, दुनिया हँसती है, मन में चैन नहीं रहता और खान-पान, सम्मान व राग-रंग भी अच्छा नहीं लगता।
05'बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ' का अर्थ क्या है?
इस पंक्ति का अर्थ है — बीती हुई बातों को भूल जाओ और आगे की याद रखो। जो काम सहजता से हो सके उस पर ध्यान लगाओ, ताकि कोई बुरा व्यक्ति हँस न सके और मन में कोई दोष या अपराधबोध न रहे।
06कुंडलिया विधा की क्या विशेषताएँ हैं?
पाठ के अनुसार कुंडलिया की प्रमुख विशेषताएँ हैं: हर कुंडलिया का पहला या दूसरा शब्द उसका अंतिम शब्द भी होता है; दो-दो पंक्तियों में बातें कही जाती हैं; पंक्तियाँ पढ़ते समय बातचीत जैसा अनुभव होता है; और सभी पंक्तियों को बोलने में बराबर समय लगता है।
07गिरधर कविराय कौन थे?
गिरधर कविराय अठारहवीं सदी के कवि थे जो अपनी नीतिपरक कुंडलियों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाओं में लाठी जैसी वस्तुओं के उपयोग और धन के बारे में भी उपदेश हैं। वे सरल और सीधी भाषा में लोकनीति और घर-गृहस्थी की बातें कहने के लिए जाने जाते हैं।
08'खटकत है जिय माहिं' का अर्थ क्या है?
'खटकत है जिय माहिं' का अर्थ है — मन में चुभता रहता है। अर्थात् बिना सोचे-समझे किया गया काम मन में हमेशा चुभता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है।
09'दुर्जन हँसै न कोइ' का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति का अर्थ है — ऐसा काम करो कि कोई बुरा व्यक्ति भी हँस न सके। कवि का संदेश है कि सोच-समझकर और सहजता से काम करने पर न कोई उपहास करेगा और न मन में कोई ग्लानि रहेगी।
10'परतीती' और 'बिसारि' शब्दों के अर्थ क्या हैं?
'परतीती' का अर्थ है विश्वास। 'बिसारि' का अर्थ है भूल जाना। कवि कहते हैं — 'यहै करु मन परतीती' यानी अपने मन को यह विश्वास दिलाओ; और 'बीती ताहि बिसारि दे' यानी बीती बातों को भूल जाओ।
11Giridhar Kaviray Ki Kundaliya summary in hindi
इस पाठ में गिरधर कविराय की दो प्रसिद्ध नीतिपरक कुंडलियाँ हैं। पहली में बिना सोचे-समझे काम करने के नुकसान बताए गए हैं — पछतावा, काम का बिगड़ना और मन की बेचैनी। दूसरी में सलाह दी गई है कि अतीत को भूलकर सहजता से आगे बढ़ो, ताकि मन में शांति रहे। दोनों कुंडलियाँ कहावतों की तरह लोकप्रिय हैं।
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