Vidyayamritamashnute
NCERT Class 12 Sanskrit Shaswati Vidyayamritamashnute — यह पाठ ईशावास्योपनिषत् से संकलित है, जो यजुर्वेद की माध्यन्दिन एवं काण्व संहिता का 40वाँ अध्याय है। इस पाठ में विद्या (आध्यात्मिक ज्ञान) और अविद्या (व्यावहारिक ज्ञान) के समन्वय से अमृतत्व-प्राप्ति का संदेश दिया गया है।
- 1स्रोत एवं विधा: यह पाठ ईशावास्योपनिषत् से संकलित है, जो यजुर्वेद की माध्यन्दिन एवं काण्व संहिता का 40वाँ अध्याय है; इस उपनिषत् में कुल 18 मन्त्र हैं।
- 2केंद्रीय भाव: लौकिक विद्या (अविद्या) और आध्यात्मिक विद्या दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं; मानव-जीवन की परिपूर्णता एवं सर्वाङ्गीण विकास के लिए दोनों समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।
- 3प्रमुख श्लोक 1 (मन्त्र 1): 'ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत् । तेन त्यक्तेन भुंजीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥' — भावार्थ: यह समस्त जगत् ईश्वर से व्याप्त है; त्यागपूर्वक भोग करो और किसी के धन का लोभ मत करो।
- 4प्रमुख श्लोक 2 (मन्त्र 7): 'विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं स ह । अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते ॥' — भावार्थ: जो विद्या और अविद्या दोनों को जानता है, वह अविद्या से मृत्यु पार कर विद्या से अमृतत्व प्राप्त करता है।
- 5मुख्य शिक्षा: जो केवल अविद्या (व्यावहारिक ज्ञान) में रत हैं वे अन्धकार में जाते हैं, और जो केवल विद्या (आध्यात्मिक ज्ञान) में रत हैं वे और भी अधिक अन्धकार में — इसीलिए दोनों का समन्वय आवश्यक है।

