Summary
NCERT Class 10 Sanskrit Abhyaswaan Bhav Samasah (समासाः) संस्कृत व्याकरण का सातवाँ पाठ है जो समास अर्थात् सामासिक शब्द-निर्माण की अवधारणा सिखाता है। इस पाठ में श्रुति और अनुकृति के संवाद के माध्यम से समास के चार मुख्य भेदों — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वन्द्व और बहुव्रीहि — को उदाहरण एवं अभ्यास सहित समझाया गया है।
यह पाठ NCERT अभ्यासवान् भव (दशमकक्षा) की व्याकरण-श्रृंखला का भाग है। श्रुति और अनुकृति के संवाद से स्पष्ट होता है कि शब्दों को पृथक्-पृथक् लिखना 'विग्रह:' और उन्हें संक्षिप्त संयुक्त रूप में लिखना 'समास:' कहलाता है। पाठ में चार भेद विस्तार से समझाए गए हैं: अव्ययीभाव (पूर्वपद प्रधान, सदा नपुंसकलिंग), तत्पुरुष (उत्तरपद प्रधान, जिसमें कर्मधारय और द्विगु भी सम्मिलित हैं), द्वन्द्व (सभी पद प्रधान) और बहुव्रीहि (अन्यपद प्रधान)। प्रत्येक भेद के बाद अभ्यास-तालिकाएँ दी गई हैं।
Key points & formulas
- 01पाठ का स्रोत: NCERT अभ्यासवान् भव, दशमकक्षा — यह एक शुद्ध व्याकरण-पाठ है; समास (सामासिक शब्द-निर्माण) इसका केंद्रीय विषय है।
- 02केंद्रीय परिभाषा: 'शब्दानां पृथक्-पृथक् लेखनं विग्रह: कथ्यते तथैव समस्तरूपेण (संक्षिप्तरूपेण) वा लेखनं समास: इति कथ्यते।' — अर्थात् संक्षिप्त संयुक्त रूप समास और उसका विस्तार विग्रह है।
- 03अव्ययीभाव: पूर्वपद प्रधान; समस्तपद सदा नपुंसकलिंग में; पूर्वपद अव्यय या उपसर्ग होता है। उदाहरण — 'यथामति' (मतिम् अनतिक्रम्य), 'प्रतिदिनम्' (दिने दिने इति), 'निर्विघ्नम्' (विघ्नानाम् अभाव:)।
- 04तत्पुरुष: उत्तरपद प्रधान; पूर्वपद में द्वितीया से सप्तमी तक विभिन्न विभक्तियाँ। उदाहरण — 'ग्रामगत:' (ग्रामं गत:, द्वितीया), 'गृहपति:' (गृहस्य पति:, षष्ठी), 'असत्यम्' (न सत्यम्, नञ्-तत्पुरुष)।
- 05कर्मधारय एवं द्विगु (तत्पुरुष के भेद): कर्मधारय में विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय होते हैं — 'सिंहपुरुष:' (सिंह इव पुरुष:); द्विगु में प्रथम पद संख्यावाचक होता है — 'नवरात्रम्' (नवानां रात्रीणां समाहार:), 'त्रिलोकम्' (त्रयाणां लोकानां समाहार:)।
- 06द्वन्द्व: सभी पद प्रधान; तीन उपभेद — इतरेतरद्वन्द्व (द्विवचन/बहुवचन), समाहारद्वन्द्व (नपुंसकलिंग एकवचन, जैसे 'पाणिपादम्'), एकशेषद्वन्द्व (एक शब्द के द्विवचन से दोनों की सूचना, जैसे 'पितरौ' = माता च पिता च)।
- 07बहुव्रीहि: अन्यपदप्रधान — दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद का संकेत करते हैं; विग्रह में अंत में 'यस्य स:' / 'यस्याः सा' आता है। उदाहरण — 'चतुर्मुख:' (चत्वारि मुखानि यस्य स: — ब्रह्मा), 'त्रिनेत्र:' (त्रीणि नेत्राणि यस्य स: — शिव), 'पीताम्बर:' (श्रीकृष्ण के संदर्भ में)।
- 08पाठ में उद्धृत श्लोक (तत्पुरुष प्रकरण में, 'आकाशपतितम्' उदाहरण के नीचे): 'आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम्। सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति।।' — भाव: जैसे आकाश से गिरा जल सागर में ही जाता है, वैसे सभी देवों को किया नमस्कार केशव तक ही पहुँचता है।
Frequently asked questions
01समास किसे कहते हैं?
दो या अधिक शब्दों को मिलाकर उनका संक्षिप्त संयुक्त रूप बनाना 'समास' कहलाता है। पाठ के अनुसार — 'समस्तरूपेण (संक्षिप्तरूपेण) वा लेखनं समास: इति कथ्यते।'
02विग्रह किसे कहते हैं? Samas aur vigrah mein kya antar hai?
समस्तपद (संयुक्त शब्द) को पृथक्-पृथक् विस्तार से लिखना 'विग्रह:' कहलाता है। उदाहरण: 'प्रतिदिनम्' समास है; 'दिने दिने इति' उसका विग्रह है।
03Samas ke kitne bhed hain? समास के भेद बताइए।
पाठ के अनुसार समास के मुख्यतः चार भेद हैं — (1) अव्ययीभाव, (2) तत्पुरुष (जिसमें कर्मधारय और द्विगु भी सम्मिलित हैं), (3) द्वन्द्व, (4) बहुव्रीहि।
04अव्ययीभाव समास की क्या विशेषताएँ हैं?
पाठ के अनुसार इसमें पूर्वपद (प्रथम शब्द) अव्यय या उपसर्ग होता है; सभी पद नपुंसकलिंग में होते हैं; पूर्वपद प्रधान होता है और क्रियापद उसी के अनुसार अर्थ बोधाता है।
05Tatpurush samas ki paribhasha aur udaharan?
जिस समास में पूर्वपद में द्वितीया से सप्तमी तक विभिन्न विभक्तियाँ हों और उत्तरपद प्रधान हो, वह तत्पुरुष है। उदाहरण: 'पर्वतारूढ:' = पर्वतम् आरूढ: (द्वितीया); 'गृहपति:' = गृहस्य पति: (षष्ठी); 'चिन्तामग्न:' = चिन्तायां मग्न: (सप्तमी)।
06कर्मधारय समास क्या है? उदाहरण दीजिए।
तत्पुरुष का वह भेद जिसमें दोनों पद एक ही विभक्ति (प्रथमा) में हों और विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध हो। जैसे: 'महादेवी' = महती च इयं देवी; 'सिंहपुरुष:' = सिंह इव पुरुष:; 'चन्द्रमुखम्' = चन्द्र: इव मुखम्।
07'पीताम्बर:' किस समास का उदाहरण है?
यह बहुव्रीहि समास है। पाठ में श्रीकृष्ण के संदर्भ में इसका उल्लेख है — 'स: पीताम्बरं धारयति स्म अतः स: पीताम्बर: इति नाम्ना अपि प्रसिद्ध:।' विग्रह: पीतम् अम्बरं यस्य स:।
08द्वन्द्व समास के भेद कौन-कौन से हैं?
पाठ के अनुसार तीन भेद हैं — (1) इतरेतरद्वन्द्व: सभी पद प्रधान, उनकी संख्या के अनुसार द्विवचन/बहुवचन; (2) समाहारद्वन्द्व: दोनों पदों का समाहार, नपुंसकलिंग एकवचन, जैसे 'पाणिपादम्'; (3) एकशेषद्वन्द्व: एक शब्द के द्विवचन से दोनों की सूचना, जैसे 'पितरौ' = माता च पिता च।
09Bahuvrihi samas ki kya visheshata hai?
बहुव्रीहि में दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद (तीसरी वस्तु या व्यक्ति) का संकेत करते हैं — इसलिए यह अन्यपदप्रधान होता है। विग्रह में अंत में 'यस्य स:' / 'यस्याः सा' आता है। जैसे: 'चतुर्मुख:' = चत्वारि मुखानि यस्य स: (ब्रह्मा); 'सिंहवाहना' = सिंह: वाहनं यस्या: सा (दुर्गा)।
10द्विगु समास किसे कहते हैं? Dvigu samas udaharan
तत्पुरुष का वह भेद जिसमें प्रथम पद संख्यावाचक शब्द हो और समस्तपद किसी समूह/समाहार का बोध कराए। ये नपुंसकलिंग या स्त्रीलिंग में होते हैं। जैसे: 'नवरात्रम्' = नवानां रात्रीणां समाहार:; 'त्रिलोकम्' = त्रयाणां लोकानां समाहार:; 'पञ्चवटी' = पञ्चानां वटानां समाहार:।
11बहुव्रीहि और कर्मधारय में क्या अंतर है?
कर्मधारय में उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पद मिलकर उसी पद का वर्णन करते हैं (विशेषण-विशेष्य); बहुव्रीहि में दोनों पद मिलकर किसी अन्य (तीसरे) पद का संकेत करते हैं। उदाहरण: 'पीतपुष्पम्' = पीतानि पुष्पाणि (कर्मधारय); 'पीताम्बर:' = पीतम् अम्बरं यस्य स: (बहुव्रीहि — कृष्ण)।
12इस पाठ में श्रुति और अनुकृति के संवाद का क्या उद्देश्य है?
पाठ के आरंभ में दोनों के संवाद के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि दैनिक भाषा में हम शब्दों को पृथक् (विग्रह) या संयुक्त (समास) दोनों रूपों में प्रयोग करते हैं — जैसे 'दिनं दिनं समयम् अनतिक्रम्य' का समास 'यथासमयम्' होता है।
13NCERT Class 10 Sanskrit Samasah chapter mein kaun sa shloka hai?
तत्पुरुष प्रकरण में 'आकाशपतितम्' उदाहरण के अंतर्गत यह श्लोक दिया गया है: 'आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम्। सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति।।'
14क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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