Matribhumi
'Matribhumi' Class 6 Hindi (Malhar) ki ek deshbhakti kavita hai, jiske kavi Sohanlal Dwivedi hain — इस कविता में कवि ने हिमालय, गंगा-यमुना-त्रिवेणी, झरनों और अमराइयों का वर्णन करते हुए राम, कृष्ण और बुद्ध की इस धरती को पुण्य-भूमि, मातृभूमि और बुद्ध-भूमि कहा है।
- 1विधा एवं कवि: यह एक देशभक्ति कविता है, जिसके कवि सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हैं — हिंदी के प्रसिद्ध देशभक्त कवि जिनका सबसे प्रिय विषय 'देशभक्ति' था।
- 2केंद्रीय भाव: अपनी जन्मभूमि भारत के प्रति गहरा प्रेम और गर्व — भारत को माँ के समान पूजनीय बताया गया है।
- 3प्रकृति चित्रण: हिमालय, गंगा-यमुना-त्रिवेणी, पहाड़ी झरने, चिड़ियाँ, घनी अमराइयाँ, कोयल और सुगंधित मलय पवन का जीवंत वर्णन है।
- 4महापुरुषों का उल्लेख: रघुपति (राम), सीता, श्रीकृष्ण (वंशी-गीता) और गौतम बुद्ध (दया व प्रकाश) का उल्लेख भारत के धार्मिक गौरव को दर्शाता है।
- 5काव्य-सौंदर्य: "वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी" की टेक (refrain) और 'भूमि' से बने अनेक विशेषण — पुण्य, स्वर्ण, धर्म, कर्म, युद्ध, बुद्ध — कविता को संगीतात्मक और अर्थपूर्ण बनाते हैं।
