Summary
NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 10 Meera Ke Pad (मीरा के पद) — मीराँबाई (जन्म: सन् 1498, कुड़की गाँव, मारवाड़ रियासत; मृत्यु: सन् 1546) द्वारा रचित कृष्णभक्ति के मुक्तक गेय पद हैं। इस अध्याय में एक पद है जिसमें कवयित्री मीरा ने श्रीकृष्ण (गिरधर गोपाल) को अपना एकमात्र आराध्य और पति घोषित करते हुए अनन्य भक्ति-प्रेम की अभिव्यक्ति की है।
मीराँबाई सगुण भक्ति धारा की महत्वपूर्ण कवयित्री थीं जो कृष्ण को अपना पति और आराध्य मानती थीं। संत कवि रैदास उनके गुरु थे। उन्होंने लोक-लाज और कुल की मर्यादा का विरोध किया तथा स्त्री-मुक्ति की आवाज़ बनकर उभरीं। प्रस्तुत पद में मीरा गिरधर गोपाल को अपना एकमात्र स्वामी बताती हैं। आँसुओं से प्रेम-बेलि सींची जो अब आनंद-फल दे रही है। दही मथकर घी निकालने के बिम्ब से भक्ति का सार ग्रहण करने की बात कहती हैं। भक्तों को देखकर प्रसन्न और जगत को देखकर दुखी होते हुए वे श्रीकृष्ण से अपना उद्धार माँगती हैं।
Key points & formulas
- 01कवयित्री परिचय: मीराँबाई का जन्म सन् 1498 में कुड़की गाँव (मारवाड़ रियासत) में हुआ; मृत्यु सन् 1546 में हुई। प्रमुख रचनाएँ: मीरा पदावली और नरसीजी-रो-माहेरो।
- 02विधा: मुक्तक गेय पद। पद नरोत्तम दास स्वामी द्वारा संकलित-संपादित 'मीराँ मुक्तावली' से लिया गया है। मीरा के पद लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत दोनों में आज भी लोकप्रिय हैं।
- 03केंद्रीय भाव: कृष्ण-भक्ति में अनन्यता — मीरा गिरधर गोपाल को अपना एकमात्र पति और आराध्य मानती हैं, कुल-मर्यादा छोड़कर संतों की संगति करती हैं और व्यर्थ कार्यों में व्यस्त लोगों के प्रति दुख प्रकट करती हैं।
- 04काव्य-सौंदर्य: मीरा की कविता का प्रधान गुण सादगी और सरलता है। 'कला का अभाव ही उसकी सबसे बड़ी कला है।' आँसुओं से प्रेम-बेलि सींचने और दही मथकर घी निकालने जैसे ग्रामीण बिम्बों से भक्ति की तीव्रता सहज ही अनुभव होती है।
- 05भाषा: मीरा की भाषा मूलतः राजस्थानी है तथा कहीं-कहीं ब्रजभाषा का प्रभाव भी है। साथ ही सूफ़ियों के प्रभाव को भी उनकी कविता में देखा जा सकता है।
- 06सामाजिक विद्रोह: मीरा ने लोक-लाज और कुल की मर्यादा के नाम पर लगाए गए बंधनों का विरोध किया; पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया और मंदिर में सार्वजनिक रूप से नाचने-गाने में कोई हिचक नहीं मानी। वे उस युग में स्त्री-मुक्ति की आवाज़ बनकर उभरीं।
- 07शब्दार्थ (पाठ से): कानि = मर्यादा; ढिग = साथ; बेलि = प्रेम की बेल; विलोयी = मथी; छोयी = छाछ, सारहीन अंश।
Frequently asked questions
01मीरा का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1498 में कुड़की गाँव (मारवाड़ रियासत) में। उनकी मृत्यु सन् 1546 में हुई।
02मीरा की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
मीरा पदावली और नरसीजी-रो-माहेरो उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।
03मीरा के गुरु कौन थे?
संत कवि रैदास उनके गुरु माने जाते हैं।
04Meera Ke Pad NCERT Class 11 ka central theme kya hai?
पद में मीरा ने श्रीकृष्ण (गिरधर गोपाल) के प्रति अपनी अनन्य भक्ति व्यक्त की है। उन्होंने कुल-मर्यादा त्यागकर कृष्ण को ही अपना एकमात्र आराध्य और पति माना है तथा व्यर्थ कार्यों में व्यस्त लोगों के प्रति दुख प्रकट किया है।
05'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई' — इस पंक्ति का भाव क्या है?
मीरा कृष्ण (गिरधर गोपाल — जो मोर-मुकुट धारण करते हैं) को अपना एकमात्र स्वामी और पति मानती हैं; उनके अतिरिक्त कोई अन्य उनका नहीं है।
06मीरा जगत को देखकर क्यों रोती हैं?
पाठ की भूमिका के अनुसार मीरा व्यर्थ के कार्यों में व्यस्त लोगों के प्रति दुख प्रकट करती हैं। पद में कहा गया है — 'भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी।'
07मीरा की कविता की भाषा कौन-सी है?
उनकी भाषा मूलतः राजस्थानी है तथा कहीं-कहीं ब्रजभाषा का प्रभाव भी है।
08मीरा किस भक्ति धारा की कवयित्री थीं?
वे सगुण भक्ति धारा की महत्वपूर्ण कवयित्री थीं। उनकी कविता में सगुण भक्ति मुख्य रूप से मौजूद है, लेकिन निर्गुण भक्ति का प्रभाव भी मिलता है।
09'अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी' — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
मीरा कहती हैं कि उन्होंने आँसुओं के जल से सींचकर प्रेम की बेल बोई, जो अब फैल गई है और आनंद-रूपी फल दे रही है।
10'दधि मथि घृत कािढ़ लियो, डारि दयी छोयी' — इस पंक्ति का भाव क्या है?
मीरा दही मथकर घी निकालने के बिम्ब से कहती हैं कि उन्होंने भक्ति का सार (घृत) ग्रहण किया और सारहीन अंश (छोयी = छाछ) को छोड़ दिया।
11मीरा ने सामाजिक बंधनों के विरुद्ध क्या किया?
उन्होंने लोक-लाज और कुल की मर्यादा के नाम पर लगाए गए बंधनों का विरोध किया, पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया और मंदिर में सार्वजनिक रूप से नाचने-गाने में कोई हिचक नहीं महसूस की।
12क्या NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 10 PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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